Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

सच्चाई

सच्चाई हम सब बहुत से दिनों को बड़े ही प्रेम से मनातें हैं,जैसे फ्रेंडशिप डे,मदर्स डे,फादर्स डे ,टीचर्स डे,और न …


सच्चाई

हम सब बहुत से दिनों को बड़े ही प्रेम से मनातें हैं,जैसे फ्रेंडशिप डे,मदर्स डे,फादर्स डे ,टीचर्स डे,और न जाने क्या क्या डेज।उसमें भी अपने उत्तम मनोभावों को लिख कर या फोन पर हम व्यक्त करतें हैं और अच्छा भी बहुत लगता हैं।सर्वोत्तम शब्दों का,सर्वोत्तम कहावतें और मुहावरों का प्रयोग कर सर्वोत्तम रचनाएं बनाते हैं,कितना उत्तर प्रयोग हैं अपनी भावनाओं का? सही में उत्तम।लेकिन उन लिखे शब्दों,कहावतें या मुहावरों का प्रयोग किया गया था उसका शब्दश: पालन कोई भी कर पता हैं या करने को इच्छुक हैं क्या?नहीं कोई भी नहीं,फ्रेंडशिप डे पर दोस्त को बहुत सारे खिताब देने वाला ही सही समय पर खिसक जायेगा, दिलोजान दोस्ती गायब हो जाती हैं जब सही मायने में जरूरत पड़ती हैं।वैसे ही फादर्स डे या मदर्स डे में भी होता हैं।माता पिता को अमूल्य खिताबों से नवाज ने वाली संताने कुछ लम्हे उनके साथ नहीं बीता कर अपने दोस्तों के साथ मौजमस्ती या सोशल मीडिया में व्यस्त रहते हैं तो एक प्यार का जुनजुना बजा कर उन्हे खुश करने की कोशिशें बेकार हैं।
वैसे ही शिक्षक दिन के बारे में भी होता हैं।सर्व प्रथम तो न शिक्षक पहले जैसे रहे और न ही शिष्य– शायद विद्यार्थी कहना ज्यादा उचित रहेगा। शिक्षक अब सिर्फ अर्थोपारजन में ही ज्यादा रस रखतें हैं, विद्यार्थियों को सिर्फ पढ़ना ही मकसद रह जाता हैं,उनका सर्वांगी विकास,उनकी दिमागी उलझनें और भी बहुत से प्रश्न उन्हे भ्रमित कर रहें होते हैं जिनके लिए एक शिक्षक का उन्हे मार्गदर्शन मिले ये अति आवश्यक होता हैं।वहीं शिष्य के बारे में कह सकतें हैं।उन्हे कभी अवश्यकता ही नहीं लगती शिक्षक का दिल से सम्मान करने की, हां दिखावा जरूर कर लेते हैं,मन सम्मान देने की लेकिन उनकी पीठ पीछे अपमानजनक शब्द प्रयोग या कभी तो हीन कक्षा की टिपोनियां करने में भी पूछे नहीं रहतें।
जो व्यवहार की हम इच्छा रखते हैं उन्हे वास्तविक रूप देनें के लिए संस्कार,एक अच्छे उछेर की जरूरत हैं।माता पिता या अभिभावकों में भी जागृति जरूरी हैं।अगर वे लोग ही ऐसा करेंगे तो बच्चें तो और बढ़चढ़ करके करेंगे।एक दिखावे की दुनिया का उद्भव हो रहा हैं,जहां भी देखो दिखावे बाजी ही देखने मिलती हैं।चाहे रिश्ता कोई भी हो।कोई भी प्रसंग हो,शादी,जन्मदिन या कोई भी प्रसंग हो,बस दिखावा ही होता हैं,कभी अपना धनवान होने का तो कभी सौंदर्य जो मानव सर्जित भी हो सकता हैं।
सास – बहु का रिश्ता,देवरानी–जेठानी, ननंद – भौजाई,बहनें ही क्यों न हो सब दिखावा करने से बाज नहीं आती,ऐसे गले मिलते हैं जैसे दोनों एक दूसरे के बगैर जी ही नहीं सकते लेकिन दूसरे ही पल मौका मिला नहीं कि उसी की बुराई करने लग जातें हैं।
एक अच्छा मॉरल ले कि सब से प्यार से प्यार करेंगे,किसी की भी फालतू में बुराई नहीं करेंगे,प्यार उतना ही जताएंगे जितना आवश्यक हैं।सही समय पर जा मदद करेंगे ये सब कसमें लेने की आवश्यकता दिख रही हैं।

About author

Jayshree birimi
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद (गुजरात)

Related Posts

सीआरपीसी आईपीसी एविडेंस एक्ट को रिप्लेस करने वाले बिल संसद में पेश

August 13, 2023

अंग्रेज़ी संसद द्वारा बनाए भारतीय क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के तीन कानूनों 1860-2023 का युग समाप्ति की प्रक्रिया शुरू सीआरपीसी आईपीसी

भारतीय संस्कृति के विविध रंगों और आध्यात्मिक शक्ति का आकर्षण

August 13, 2023

हमारे देश में कला की सबसे प्राचीन और सबसे श्रेष्ठ परिभाषाएं व परंपराएं विकसित हुई हैं वैश्विक स्तरपर भारतीय संस्कृति

चीन पर प्रतिबंधों का ज़बरदस्त प्रहार

August 13, 2023

भारत अमेरिका मिलकर ड्रैगन को दे रहे झटके पे झटका ! भारत ने ड्रैगन पर लैपटॉप टेबलेट तो अमेरिका ने

बदलेंगे अंग्रेजों के ज़माने के कानून

August 13, 2023

बदलेंगे अंग्रेजों के ज़माने के कानून आपराधिक न्याय प्रणाली ब्रिटिश औपनिवेशिक न्यायशास्त्र की प्रतिकृति है, जिसे राष्ट्र पर शासन करने

सेलिब्रिटीज सावधान ! विज्ञापन की नई गाइडलाइंस 2023 ज़ारी

August 11, 2023

सेलिब्रिटीज सावधान ! विज्ञापन की नई गाइडलाइंस 2023 ज़ारी Image credit -Google  स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती उत्पादों के विज्ञापनों संबंधी केंद्र

संवेदनशील क्षेत्रों में हिंसा का मुकाबला।

August 11, 2023

संवेदनशील क्षेत्रों में हिंसा का मुकाबला। Image credit -Google ऐसे कई उदाहरण हैं जहां विकास कार्यक्रमों और दृष्टिकोणों से हिंसा

PreviousNext

Leave a Comment