Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

संक्रांति -डॉ. माध्वी बोरसे

संक्रांति ! चलो हम सब मिलकर बनाते हैं मकर संक्रांति, सर्दियों में आलस्य में जकड़ा, शरीर पकड़े थोड़ी सी गति,भागदौड़, …


संक्रांति !

संक्रांति -डॉ. माध्वी बोरसे
चलो हम सब मिलकर बनाते हैं मकर संक्रांति,

सर्दियों में आलस्य में जकड़ा, शरीर पकड़े थोड़ी सी गति,
भागदौड़, हल्ला गुल्ला और बहुत सारी मौज मस्ती,
इस त्यौहार की महत्वता संपूर्ण भारत में मानी जाती!

खुले आसमान में, सभी पतंग उड़ाते,
मूंगफली और गुड से बनी चिक्की,और तिलगुड़ से बने व्यंजन खाते,
बड़े हर्षोल्लास से यह त्यौहार को मनाते ,
आसमान में विहंगम दृश्य, भरपूर आनंद ह्रदय में जगाते!

चलो पतंग की तरह, हम अपने सपनों को भी उड़ान दे,
नई-नई ऊंचाइयों को छू के, अपनी काबिलियत का प्रमाण दें,
चलो ढील देकर मंजिल तक पहुंचे, यही तो असली शान है,
स्वतंत्रता से पूरे करें, जो भी मन में अरमान है!!

डॉ. माध्वी बोरसे!
(स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

अजय प्रसाद की रचनाएं

March 26, 2022

अजय प्रसाद की रचनाएं  हमसे हमारे ख्वाब न छीन काँटों भरी गुलाब न छीन ।जिंदा तो हूँ गफलत में सहीयादों

क्या आप अपने बच्चों को टॉपर बनने के लिए फोर्स करते हैं?

March 26, 2022

क्या आप अपने बच्चों को टॉपर बनने के लिए फोर्स करते हैं? जी अगर आप अपने बच्चे को, टॉपर बनने

कॉर्पोरेट में महिलाएं!-डॉ. माध्वी बोरसे!

March 26, 2022

कॉर्पोरेट में महिलाएं! हमारी काल्पनिक कथाओं ने बताया कि महिला अपने दस हाथों से परिवार का नेतृत्व करती है। दो

मेरा मन है एक बंजारा- वीना आडवाणी तन्वी

March 26, 2022

मेरा मन है एक बंजारा मेरा मन है एक बंजारा स्थिर नहीं ये फिरता मारामाराकभी प्राकृतिक सौंदर्य में फिरेतो कभी

हौंसले-जयश्री बिरमी

March 25, 2022

हौंसले एक सुंदर नारीचल पड़ी गगन विहारीथा उसे उडना बहुतदूर दूर क्षितिज से भी दूरपंख थे छोटे और कोमलपार करेगी

जब वक्त थम सा गया-जयश्री बिरमी

March 25, 2022

जब वक्त थम सा गया एक बार ही मिली नजरें तो दिल उसी पर आ गयामिलने के लिए उसी से

Leave a Comment