Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

शहीद कविता-नंदिनी लहेजा

शहीद शत नमन, आपके जीवन को,जिसे आपने, देश के नाम किया।हैं धन्य हमारे, वीर जवान,जिन्होंने प्राणों का, अपने दान किया। …


शहीद

शहीद कविता-नंदिनी लहेजा

शत नमन, आपके जीवन को,
जिसे आपने, देश के नाम किया।
हैं धन्य हमारे, वीर जवान,
जिन्होंने प्राणों का, अपने दान किया।

ज़बांजी, उनका शस्त्र महान ,
जिससे करते, दुश्मन का संघार।
जब तक प्राण, होते तन में,
ना मानते, सैनिक कभी हार
ना भूख प्यास, ना सर्दी गर्मी,
ना दिवाली और होली।
इनके लिए, वतन सब कुछ,
चाहे मिले दुश्मन की गोली।
शहादत को मानते, सौभाग्य अपना,
गर्व से उसे, गले लगाते हैं।
नतमस्तक हर देशवासी होता,
तिरंगे में लिपट जब वे आते हैं।
हैं धन्य वो जननी मैया,
जिन्होंने वीरों को जन्म दिया।
कुर्बान किया,लाल अपना देश पर,
कोख को अपने पावन किया।
शतनमन उस अर्धांगिनी को,
जिसका सुहाग हैं, सीमा का रक्षक।
बंधन मुक्त किया, मोह से अपने ,
गर्व से किया, जाते समय उसका तिलक।

नंदिनी लहेजा
रायपुर(छतीसगसढ़)
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित


Related Posts

अकेली होती कहां

June 24, 2022

 अकेली होती कहां डॉ. इन्दु कुमारी मेरे तो सब साथी  मैं अकेली होती कहां  हवा से भी बातें करती  पेड़

जल संरक्षण

June 24, 2022

 जल संरक्षण डॉ. इन्दु कुमारी जल ही जीवन है जीवन के संजीवन है इसे बचाना पुण्य कार्य  यही असली जनसेवार्थ।

लहरों से दोस्ती महंगी पड़ी हुज़ूर ज्वार उठा ऐसा की तैरना जानते हुए भी शख्सियत मेरी किनारे लगी

June 23, 2022

 “लहरों से दोस्ती महंगी पड़ी हुज़ूर ज्वार उठा ऐसा की तैरना जानते हुए भी शख्सियत मेरी किनारे लगी” भावना ठाकर

कितना कठिन होता है ना? माँ होना

June 23, 2022

 कितना कठिन होता है ना? माँ होना सिद्धार्थ गोरखपुरी बचपने से सबको खुश कर देना और जवां होना। बस उँगलियों

कविता – छाँव सा है पिता

June 23, 2022

 कविता – छाँव सा है पिता सिद्धार्थ गोरखपुरी गलतफहमी है के अलाव सा है पिता घना वृक्ष है पीपल की

कविता -आँखें भी बोलती हैं

June 23, 2022

 कविता -आँखें भी बोलती हैं सिद्धार्थ गोरखपुरी न जीभ है न कंठ है कहने का न कोई अंत है दिखने

PreviousNext

Leave a Comment