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Jayshree_birmi, poem

व्यंग काव्य

व्यंग काव्य सजाया बहुत मुझे रणबीरंगे वस्त्रों सेभरा हैं मुझे कईं घातक पटाखों सेइकठ्ठा हुआ हैं शहर सारा मुझे जलानेऊंचा …


व्यंग काव्य

सजाया बहुत मुझे रणबीरंगे वस्त्रों से
भरा हैं मुझे कईं घातक पटाखों से
इकठ्ठा हुआ हैं शहर सारा मुझे जलाने
ऊंचा इतना बनाया मुझे देखूं पूरा संसार
दूर दूर से आएं हैं लोग मुझे देखने
स्त्री पुरुष बच्चें बूढ़े और जवान
सज्ज़ हैं सारे जलते बाणों हुए से
जलाने एक राक्षस जो हैं पापी महान
देख सभी को मन मेरे ने सोचा
कौन मारे जो मुझे जलता हुआ बाण
हे प्रभु आज मुझे भी वाचा देदो
बताऊं मैं उन तीरंदाजों को भी
मारो मुझे तुम जलते हुए बाण
पहले पता करूं मैं तुम में से कोई हो राम
जलाने से पहले साबित करना होगा
तू भी राम से हो यही मुझे बताना होगा
लूंगा तुम्हारे कर्मों का लेखा जोखा
फिर मारना मुझे तुम वह बाण
फिर सुनों
बनो पहले राम ले लें मेरे प्राण

About author

Jayshree birimi
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद (गुजरात)

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