Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, poem

व्यंग काव्य

व्यंग काव्य सजाया बहुत मुझे रणबीरंगे वस्त्रों सेभरा हैं मुझे कईं घातक पटाखों सेइकठ्ठा हुआ हैं शहर सारा मुझे जलानेऊंचा …


व्यंग काव्य

सजाया बहुत मुझे रणबीरंगे वस्त्रों से
भरा हैं मुझे कईं घातक पटाखों से
इकठ्ठा हुआ हैं शहर सारा मुझे जलाने
ऊंचा इतना बनाया मुझे देखूं पूरा संसार
दूर दूर से आएं हैं लोग मुझे देखने
स्त्री पुरुष बच्चें बूढ़े और जवान
सज्ज़ हैं सारे जलते बाणों हुए से
जलाने एक राक्षस जो हैं पापी महान
देख सभी को मन मेरे ने सोचा
कौन मारे जो मुझे जलता हुआ बाण
हे प्रभु आज मुझे भी वाचा देदो
बताऊं मैं उन तीरंदाजों को भी
मारो मुझे तुम जलते हुए बाण
पहले पता करूं मैं तुम में से कोई हो राम
जलाने से पहले साबित करना होगा
तू भी राम से हो यही मुझे बताना होगा
लूंगा तुम्हारे कर्मों का लेखा जोखा
फिर मारना मुझे तुम वह बाण
फिर सुनों
बनो पहले राम ले लें मेरे प्राण

About author

Jayshree birimi
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद (गुजरात)

Related Posts

प्रणय की धारा- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 22, 2021

प्रणय की धारा मन का स्रोत बहुत है गहरा ,मन से निकली प्रणयकी धारा ,मन और धन का खेल निराला,

पैसे ऐंठने तक सीमित हैं- जितेन्द्र ‘कबीर

December 22, 2021

पैसे ऐंठने तक सीमित हैं साक्षात् भगवान का रूप मानतेहैं उसे,कुछ ही हैं लेकिन ऐसे,ज्यादातर ‘डाक्टर’ अंधे हुए पड़े हैंदवाई

रुकना तो कायरो का काम है!-डॉ. माध्वी बोरसे

December 22, 2021

रुकना तो कायरो का काम है! चलते जाए चलते जाए, यही तो जिंदगी का नाम है,आगे आगे बढ़ते जाए,रुकना तो

मृत्यु कविता-नंदिनी लहेजा

December 22, 2021

मृत्यु क्यों भागता हैं इंसान तू मुझसे इक अटल सत्य हूँ मैंजीवन का सफर जहाँ ख़त्म है होतावह मंजिल मृत्यु

चिंतन के क्षण- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 22, 2021

चिंतन के क्षण रोम रोम में बसी है यादें,बचा नहीं कुछ अपना है,तेरे मेरे अपने सारे सपने,बिखर गए सारे के

बेरोजगारी का एक पहलू यह भी- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 22, 2021

बेरोजगारी का एक पहलू यह भी आजकल लोगों कोघर का काम करने के लिएईमानदार और मेहनती लोग नहीं मिलते,जमीन का

Leave a Comment