Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem

व्यंग्य कविता-किसी को बताना मत|kisi ko batana mat

व्यंग्य कविता-किसी को बताना मत बड़े बुजुर्गों की कहावत सच है कि हाथी के दांत दिखाने खाने के और हैं …


व्यंग्य कविता-किसी को बताना मत

बड़े बुजुर्गों की कहावत सच है कि
हाथी के दांत दिखाने खाने के और हैं
मैं भी मतलबी दोगला स्वार्थी हूं
किसी को बताना मत

बड़े बुजुर्गों की कहावत है कि एक उंगली
दूसरे पर उठा तीन उंगली ख़ुदपर उठेगी
मैं भी दूसरों पर उंगली उठाता हूं पर तीन
उंगलियां का मैं दोषी हूं किसी को बताना मत

अपने संस्था के प्रोग्राम में मुख्य अतिथि
एसपी की पत्नी जज़अधिकारी को बुलाता हूं
उनमें मेरे कई बहुत काम फ़सते हैं
किसी को बताना मत

मैं खुद प्राकृतिक संसाधनों का अवैध
दोहन कर शासन को चुना लगाता हूं
अधिकारियों के हाथ गर्म करता हूं
किसी को बताना मत

हर गलत काम जो अवैध करता हूं
समाज में सफेदपोश बनकर रहता हूं
नामी संस्था का संस्थापक हूं
किसी को बताना मत

यह सब बातें तुम अपने हो शेयर करता हूं
भ्रष्टाचार को पूरी हवा देता हूं
प्रदूषण फैलाने का काम करता हूं
किसी को बताना मत -3

About author

Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

aatishbaaji jaruri nahi by Jitendra Kabir

November 7, 2021

 आतिशबाजी जरूरी नहीं दीवाली – दशहरे जैसे त्यौहारों में धूम – धड़ाके को जरूरी मानना हो या फिर नववर्ष के

Beta beti ek saman by Jitendra Kabir

November 7, 2021

 बेटा – बेटी एक समान आदर्शवाद दिखाने के लिए  हमनें पाठ्य – पुस्तकों में अपनी  लिखा दिया, “बेटा – बेटी

chunauti se km nahi by Jitendra Kabir

November 7, 2021

 चुनौती से कम नहीं वक्त बीतता जाता है  जैसे-जैसे कुंद पड़ती जाती है  दांपत्य में धार नयेपन की, जिन नजरों

Jhutha bhram by Jitendra Kabir

November 7, 2021

 झूठा भ्रम रोक नहीं पाते जब तुम  दुनिया के सब मजलूमों  पर होने वाले ज़ुल्म-ओ-सितम  तो फिर तुम्हारे ‘दुखहर्ता’ होने

Ek vyang nasha by Anita Sharma

November 7, 2021

 एक व्यंग्य नशा सबका मनोरंजन करते अभिनेता पर अपने घर में समय न देते। धन तो खूब कमा लेते पर

Pyar bhara Geet by Anita Sharma

November 7, 2021

 प्यार भरा गीत एक प्यार का गीत सुना दो, बंसी की मधुर तान सुना दो। मोहन गोपियों संग राधा अकु

Leave a Comment