भावनानी के भाव
वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है
भावनानी के भाव वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है रक्षा क्षेत्र में समझौतों के झंडे गाड़ रहे …
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व्याकुल अंतर- डॉ हरे कृष्ण मिश्र
January 13, 2022
व्याकुल अंतर प्रीत निभाती रात गई बित , जोड़ जोड़ कर सपने-अपने,बंद आंखों में मिलन यामिनी ,हुई भोर तो साथ
कान्हा तू काहे करत मनमानी -सरस्वती मल्लिक
January 13, 2022
कविता : कान्हा तू काहे करत मनमानी कान्हा तू काहे करत मनमानी बार -बार समझाया तुझकोफिर भी एक न मानीनित
प्रेरणा- सुधीर श्रीवास्तव
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बता रहा है धुआँ – सिद्धार्थ गोरखपुरी
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शीर्षक – बता रहा है धुआँ आदमी अंदर और बाहर उड़ा रहा है धुआँ तिल -तिल फेफड़ों को सड़ा रहा
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नशा एक परछाई-जयश्री बिरमी
January 7, 2022
नशा एक परछाई क्यों चाहिए तुम्हे वो नशाजो तुम्हे और तुम्हारे प्यारोंको करता बरबाद हैं नशा करों अपने काम काया

