Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

विरासती राजनीति

 विरासती राजनीति मुलायम सिंह जी के अवसान के समाचार सुन सब ने ही संवेदनापूर्ण संदेश दिए और शोक संदेश भी …


 विरासती राजनीति

मुलायम सिंह जी के अवसान के समाचार सुन सब ने ही संवेदनापूर्ण संदेश दिए और शोक संदेश भी सोशल मीडिया पर डाले।खास करके मोदी जी के ट्वीट्स और गुजरात की धरती से उनको भावपूर्ण श्रद्धांजलि दे उनके साथ हुई बातें और मुलाकातों की बातें बताना एक स्टेट्समैन को शोभा देता हुआ प्रसंग हैं।किसी भी प्रकार के राजकीय वैमनस्य के बगैर एक सदगत के बारे में अपना मंतव्य रखना यहीं स्वस्थ राजनीति की निशानी हैं।

वैसे ही मोदी जी के पथ पर चलके योगी जी ने भी उनके स्वास्थ्य के बारे में खबर लेते रहे और अवसान के बाद भी पूरी संवेदनाओं के साथ शोक संदेश दे कर तीन दिन का राजकीय शोक जाहिर कर दिया।वहीं गृहप्रधान अमित शाह का उनकी सेहत पूछने हस्पताल जाना और उनकी अंत्येष्ठि में राजनाथ सिंह का सम्मिलित होना एक स्वस्थ राजनीति की निशानी हैं।

मुलायम सिंह जी के बाद क्या उनके मूल्यों पर चल कर उनके वारिस उनकी गद्दी संभाल पाएंगे क्या?वैसे तो अखिलेश जी मुख्य मंत्री रह चुके हैं फिर भी आज के परिपेक्ष्य में पक्ष को संभाल पाएंगे?वैसे में वारसाई में मिली राजगद्दी कौन संभाल पाया हैं ये सोच रही थी।राजीव गांधी तक तो थोड़ा ठीक रहा किंतु उनके बाद कांग्रेस में उस परिवार से कोई कांग्रेस के मूल्यों को ध्यान में रख कर आगे नहीं जा पाएं ,लाख जतन करने के बावजूद कहीं न कहीं तो चूक हो रही हैं जो धीरे धीरे उनकी स्थिति हर राज्य में क्षीण होती जा रही हैं।

  दूसरे हैं शिवसेना अध्यक्ष बालासाहिब के बेटे उद्धव ठाकरे,जिन्होंने सत्ता के मोह में अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारी,उनसे रिश्ता जोड़ा जिनसे उनकी विचारधारा बिल कुल नहीं मिल रही थी।कांग्रेस तो एक तरह से बालासाहीब की घृणा सूची में थी तो उससे जुड़ कर क्या पाया?

 वैसे ही लालू जी के पक्ष आरजेडी में क्या होगा? क्या उनके बेटे तेजस्वी संभाल पाएंगे उनकी गद्दी? वैसे तो कारावास के बाद वापस कार्यान्वित हो गए हैं लालू जी किंतु उनके बाद दिया तले अंधेरा होगा या उनकी कार्यशैली का अनुसरण कर तेजस्वी यादव संभाल लेंगे पार्टी को?

  पार्टी के संस्थापक,जो स्तंभ से होते हैं उनके रहते जो पार्टी परवान चढ़ती हैं क्या अनुगामी उसे संभाल पाएंगे? पाते हैं क्या?

About author

Jayshree birimi
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद (गुजरात)

Related Posts

लाऊं तो कैसे और कहां से-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

लाऊं तो कैसे और कहां से कहां से लाऊ वो उत्साह जो हर साल आता थाकहां से लाऊं वह जोश

बहरूपिया-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

बहरूपिया जब हम छोटे थे तो याद आता हैं कि एक व्यक्ति आता था जो रोज ही नया रूप बना

नई आस- जयश्री बिरमी

January 6, 2022

नई आस बहुत दिनों के बाद अब जगी हैं एक नई आसहर्षोल्लास के दिन भी थे ये दिलाती हैं एहसास

अलविदा २०२१- जयश्री बिरमी

January 6, 2022

 अलविदा 2021 एक बुरे स्वप्न की समाप्ति सा लग रहा हैं इस वर्ष का समाप्त होना।और मन थोड़ा आहत भी

लघुकथा मां- जयश्री बिर्मी

January 6, 2022

 लघुकथा  मां- बहुत ही पुरानी बात हैं,जब गावों में बिजली नहीं होती थी,मकान कच्चे होते थे,रसोई में चूल्हे पर खाना

प्यार बांटते चलो- तमन्ना मतलानी

December 27, 2021

नन्हीं कड़ी में…आज की बातप्यार बांटते चलो… अपने जीवन काल में हमनें यह अवश्य ही देखा होगा कि जीवन में

Leave a Comment