Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

विद्यालय “स्कूल” हो गये…. -सचिन राणा “हीरो”

विद्यालय “स्कूल” हो गये…. नये भारत में विद्यालय जब से स्कूल हो गये… परेशान हैं अभिभावक मगर बच्चे कूल हो …


विद्यालय “स्कूल” हो गये….

विद्यालय "स्कूल" हो गये.... -सचिन राणा "हीरो"

नये भारत में विद्यालय जब से स्कूल हो गये…

परेशान हैं अभिभावक मगर बच्चे कूल हो गये…

जहाँ विद्यालय में हैड मास्टर जी ही हैड होते हैं…
वहीं स्कूल में हैड मास्टर जी के भी हैड होते हैं…

जहाँ विद्यालय में संस्कारों से सुसज्जित अनुशासन है…
वहीं स्कूल में आत्ममुग्धता से ग्रसित प्रशासन है…

विद्यालय विद्या का मंदिर जहाँ शिक्षा का अधिकार है…
स्कूलों में झूठे आडंबर वहां बस शिक्षा का प्रसार हैं…

विद्यालय में माता पिता एक बार फीस जमा कराने आते हैं…
वहीं स्कूलों में अभिभावक अपने जमा बच्चों को वापस घर लाते हैं..


विद्यालय में मां शारदा की प्रार्थना और ईश्वर की अरदास है…
स्कूलों में प्रतिस्पर्धा का तांडव और झूठे ऐश्वर्य की प्यास है…

विद्यालय और स्कूल में “राणा” बस इतना सा अंतर है…
विद्यालय का ‘अभिभावक’ स्कूलों के मदारी का बंदर है…

जहाँ विद्यालय बच्चों को सफल बनाकर भी मौन खड़े रह जाते हैं…
वहीं स्कूल वाले बच्चों को बड़ा बनाते बनाते स्वयं बड़े बन जाते हैं…

सचिन राणा “हीरो” (एंकर कवि व गीतकार)
हरिद्वार उत्तराखंड (मो 9759672053)


Related Posts

साहित्य राष्ट्र की महानता

July 6, 2023

भावनानी के भाव साहित्य राष्ट्र की महानता साहित्य राष्ट्र की महानता और वैभव का दर्पण होता है साहित्य को आकार

भारतीय नारी सब पर भारी- Kavita

July 6, 2023

भावनानी के भाव भारतीय नारी सब पर भारी पुरुषों से कम नहीं है आज की भारतीय नारी व्यवसाय हो या

नारी पर कविता | Naari par kavita

July 2, 2023

भावनानी के भाव  नारी पर कविता  नारी ऐसी होती है जो सभी रिश्तो को एक धागे में पिरोती हैमां बहन

मुझे कहॉं लेखन विद्या आती

July 2, 2023

मुझे कहॉं लेखन विद्या आती मुझे कहॉं सच लेखन विद्या आतीमैं तो बस खुद के लिए लिख जातीखुद को मिले

मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं

July 2, 2023

भावनानी के भाव मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं   मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं अटके काम

भारतीय संस्कार पर कविता

July 2, 2023

भावनानी के भाव भारतीय संस्कार पर कविता भारतीय संस्कार हमारे अनमोल मोती है प्रतितिदिन मातापिता के पावन चरणस्पर्श से शुरुआत

PreviousNext

Leave a Comment