Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

विजय दिवस- सुधीर श्रीवास्तव

विजय दिवस शुरू हुआ जो युद्ध तीन दिसंबर उन्नीस सौ इकहत्तर कोभारत पाकिस्तान के बीच मेंछुडा़ रहे थे सैनिक भारत …


विजय दिवस

विजय दिवस- सुधीर श्रीवास्तव
शुरू हुआ जो युद्ध

तीन दिसंबर उन्नीस सौ इकहत्तर को
भारत पाकिस्तान के बीच में
छुडा़ रहे थे सैनिक भारत के
छक्के पाकिस्तानी सैनिकों के।

थे बुलंद हौसले भारत के
अपने वीर जवानों के,
युद्ध भूमि में खेत रहे थे
शव पाकिस्तानी अरमानों के।

युद्ध भूमि में पाकिस्तान के सैनिक
फँसे थे जैसे चूहे के बिल में,
युद्ध देख लड़ने से ज्यादा
सोचें अपनी जान बचाने में।

तेरह दिन तक जैसे तैसे
आखिर युद्ध को खींच गये,
तेरहवें दिन थकहार कर
मनोबल अपना हार गये।

सोलह दिसंबर उन्नीस सौ इकहत्तर को
स्वर्णिम दिवस जब आया,
पाकिस्तानी जनरल नियाजी
तिरानब्बे हजार सैनिकों संग
घुटनों के बल चलकर

भारत के मेजर जनरल
सैम मानकेशा के सम्मुख
हथियार रख शीष झुकाया।
बांग्लादेश मुक्ति वाहिनी ने भी तब
उत्सव खूब मनाया,

उसी दिवस बाँग्लादेश
संसार के नक्शे पर आया।
पहली बार स्वतंत्र देश बन
स्वतंत्रता दिवस मनाया,

पाकिस्तान का मानमर्दन कर
तब भारत ने विजय दिवस मनाया।
अपने शहीद जाँबाजों का
सम्मान आज भी हम करते हैं,

दिल्ली में इंडिया गेट पर आज
अमर जवान ज्योति जाकर
हर साल श्रद्धांजलि देते हैं।
भारत के रक्षामंत्री भी
जाकर श्रद्धांजलि देते हैं,

पूरे देश की ओर वे
वीर सपूतों को नमन करते हैं।
तीनों सेना प्रमुख भी
सम्मान में शीश झुकाते है,

भारत के वीर शहीदों के प्रति
श्रद्धाभाव दिखाते हैं।
तभी से हम भारतवासी
विजय दिवस मनाते हैं,
शान से लहराते तिरंगे को देख
भारतवासी बहुत हर्षाते हैं।

✍️ सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
©मौलिक, स्वरचित


Related Posts

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!!

March 25, 2022

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!! भारत में अब आ गई है नवाचारों की बौछार डिजिटल पारदर्शी नीतियों से हो गए

कविता -मां की ममता

March 25, 2022

कविता-मां की ममता मां की ममता मिलती हैं सबको कोई अच्छूता नहींकद्र करने की बात है, कोई करता कोई नहीं मां

भाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान

March 25, 2022

कविताभाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहन करने बहुभाषावाद को बढ़ावा देने एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रसार करने

सुकूँ चाहता है-सिद्धार्थ गोरखपुरी

March 25, 2022

सुकूँ चाहता है ठिकाना बदलना जो तूँ चाहता है जमाने से क्या तूँ सुकूँ चाहता है?जमाना बुरा है तूँ कहता

नारी- डॉ. इन्दु कुमारी

March 25, 2022

नारी क्या है तेरी लाचारी क्यों बनती तू बेचारीरिश्तो को निभाती आईजैसे बदन को ढकती साड़ीनारी !नारी!!ओ नारीस्व को मिटाने

ईमानदारी कविता -जयश्री बिरमी

February 24, 2022

ईमानदारी कहां कहां ढूंढू तुझे बता दे जराढूंढा तुझे गांव गांव और गली गलीढूंढने के लिए तुझे मैं तो शहर

Leave a Comment