Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

वाह क्या किस्मत पाई है!

 वाह क्या किस्मत पाई है! रात रात भर जाग के, की उसने मेहनत ,  जीते बहुत से पुरस्कार और परिश्रम …


 वाह क्या किस्मत पाई है!

वाह क्या किस्मत पाई है!

रात रात भर जाग के, की उसने मेहनत , 

जीते बहुत से पुरस्कार और परिश्रम किया बेहद,

और कुछ लोगों ने कहा वाह क्या किस्मत पाई है,

आखिर कैसे  एक ही कक्षा में इतने पुरस्कार लाई हे ! 

कम उम्र में ही उसने की नौकरी शुरू और बच्चों को ट्यूशन दिया ,

दिन भर काम रात भर पढ़ाई और खूब सारा अनुभव लिया,

और लोगों ने कहा वाह क्या किस्मत पाई है,

इतनी कम उमर में इतना सारा अनुभव केसे लाई हे!

कभी निमोनिया तो कभी ज्वाइंडिस तो छोटी सी उम्र में हृदय  का ऑपरेशन होना,

जिंदगी दो पल की हो तो उसने सोचा क्यों ना फिर हर पल को खुल के जीना,

और लोगों ने कहा वाह क्या किस्मत पाई है

हर पल मे ये खुशी से मुस्कुराई है ! 

थोड़ी बड़ी ना हुई कुछ लोगों ने कहा उम्र जा रही इसकी करवा दो शादी,

टूटे सपने हुआ धोखा और उठाई तकलीफे 

और हो गई बर्बादी,

दिखाई हिम्मत तोड़ा नाता और खोली अपनी छोटी सी कक्षा ,

पढ़ाया उन बच्चों को और उन नारियों को और सिखाया कैसे करते हैं स्वयं की सुरक्षा  ! 

किया परिश्रम, मिली उपाधियां, कभी अखबार, कभी मैगजीन, 

तो कभी रेडियो पर नाम,

और दिखाया और सिखाया कैसे होता है नारी का सम्मान ,

और लोगों ने कहा वाह क्या किस्मत पाई है,

इतनी कम उम्र में सफलता की ऊंचाइयां छूती जा रही है, 

ऊपर वाला भी जब साथ देता है जब हम करते हैं प्रयास,

किस्मत भी उन्हीं का साथ देती है जो करते हैं खुद पे विश्वास, 

किस्मत भी उन्हीं का साथ देती है, जो दिखाते हैं साहस,

आगे से ना कहना किसी काै किस्मत वाली,

बगीचा किस्मत से नहीं मेहनत से बनता है,

जब उसमें काम करते हैं माली ,

तो फिर कभी कहो तो कहना मैं बनी हुं तो अपने साहस से, अत्यधिक प्रयास से,

बहुत से त्याग से,

परिश्रम से, संघर्ष से और अटूट विश्वास से, 

आप सभी के प्यार से, प्रोत्साहन से और बहुत सारे आशीर्वाद से!!

डॉ. माध्वी बोरसे!

( स्वरचित व मौलिक रचना)

राजस्थान (रावतभाटा


Related Posts

ऐ चाँद- डॉ. इन्दु कुमारी

January 25, 2022

ऐ चाँद लिख रही तेरी दास्तानशीतलता करते प्रदानदागदार वह कहलाते हैंजीवों के हित आते हैंचाँदनी फिर छिटकाते हैंनिशब्द भरी रातों

भारत माता – डॉ. इन्दु कुमारी

January 25, 2022

भारत माता भारत जननी तू हो महानतूने जने हो वीर संतानसिर हिमालय की पायीचरणों को धोता सागर हैशेरों की है

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 25, 2022

कविता -मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम चतुर्भुज रूप में जन्म लियाअयोध्या को अनुराग दियामाँ कौशल्या के कहने परमूल रूप को त्याग दियाबाल्यकाल

जरा सोचो इंसान – मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी”

January 25, 2022

जरा सोचो इंसान अपनी जुबां से किसी को कभी ना सताना।मौत भी आकर कहे तो बहाना ये बनाना।।सम्भल कर कदम

माँ का आँचल- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 25, 2022

कविता -माँ का आँचल माँ एक बार फिर से मुझको,आँचल ओढ़ के सो जाने देबचपन की यादें ताज़ा हो जाएँ

अक्ल पर पत्थर मढ़े जाएं- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

अक्ल पर पत्थर मढ़े जाएं दुनिया में लोगों ने पहलेअपनी – अपनी आस्था के अनुसारमंदिर, मस्जिद, गिरजे, गुरुद्वारेऔर भी नाना

Leave a Comment