वर्णों से शब्दों का भ्रमजाल
वर्णों से शब्दों का भ्रमजाल /varno se shabdon ka bramjal
वर्णों से शब्दों का भ्रमजाल वर्णों के भ्रमजाल से बने शब्द देख कलम संग दुनिया भटक ही जाती है तिलस्मी …
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तुम हमारी कामना – डॉ हरे कृष्ण मिश्र
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तुम हमारी कामना संभावना से कौन करता ,कब कहां इनकार है ,प्रेम का परिणाम होगा ,दर्द का अभिशाप अपना।। शालीन
सत्य है क्या?- जितेन्द्र ‘कबीर’
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जरूरत है जागरूक बनने की- जितेन्द्र ‘कबीर’
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जरूरत है जागरूक बनने की देखकर उन्हें आनी चाहिएआम जनता में सुरक्षित होने की भावना,निकल जाना चाहिए डर मन सेगुण्डों,
सहनशीलता- सुधीर श्रीवास्तव
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क्या हमनें पा लिया है?- जितेन्द्र ‘कबीर’
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