वर्णों से शब्दों का भ्रमजाल
वर्णों से शब्दों का भ्रमजाल /varno se shabdon ka bramjal
वर्णों से शब्दों का भ्रमजाल वर्णों के भ्रमजाल से बने शब्द देख कलम संग दुनिया भटक ही जाती है तिलस्मी …
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ऊँचा हो गया कद लोगों का जमींन से-विजय लक्ष्मी पाण्डेय
February 3, 2022
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मेरे यार फेसबुकिए-सिद्धार्थ गोरखपुरी
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मेरे यार फेसबुकिए मेरे यार फेसबुकिए बता दो इस समय तुम हो कहाँमैंने तुम्हें ढूंढ रहा हूँयहाँ -वहाँ न जाने
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रात है तो सुबह भी तो आयेगी मन रे तू मत हो निराशकल एक नयी सुबह आयेगी।बीतेगी दुखो की घड़ियाँछायेगा
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राजनीति के सियार- जितेन्द्र ‘कबीर’
January 25, 2022
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