Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veena_advani

वक्त संग कारवां

वक्त संग कारवां वक्त संग दर्द-ए कारवां मेरा गुज़रता जा रहा थादिल तेरे लौटने कि उम्मीद आज भी लगा रहा …


वक्त संग कारवां

वक्त संग दर्द-ए कारवां मेरा गुज़रता जा रहा था
दिल तेरे लौटने कि उम्मीद आज भी लगा रहा था।।

जानती हूं तुम मुझे छोड़ कर पराई बांहों में समाए
तोड़ मुझको बता कैसे तेरा दिल मुस्कुरा रहा था।।

सात फेरों के बंधन हमारे बीच बंधे हैं रिश्ते में
इन बंधनों से छल किया तू यही दर्द सता रहा था।।

मेरी हर ख्वाहिशों का क़ातिल आज तू ही तो
अपनी ख्वाहिशों को दबा दिल आंसू बहा रहा था।।

जानती हूं बेवफा लौट ना अब पाएगा कभी
फिर भी मेरा जख़्मी दिल लिख तुझे सजा रहा था।।

चाहती थी जाने ये जमाना मेरी भी दर्द-ए दास्तां
जमाना वीणा दर्द-ए शायरा नाम दे मुझे बुला रहा था।।

दर्द देकर आंसूओं से भिगोया हे तूने ही मेरा दामन
तेरे सलामती के लिए दामन उठाया ना जा रहा था।।

वक्त संग दर्द-ए कारवां मेरा गुज़रता जा रहा था
दिल तेरे लौटने कि उम्मीद आज भी लगा रहा था।

About author 

Veena advani

वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर , महाराष्ट्र



Related Posts

जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा

April 27, 2022

जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा दुनिया का दस्तूर हे ये जो जैसा करेगा वैसा भरेगाआज हसे दुनिया चाहे कल

वीणा के सुर खामोश हो रहे

April 27, 2022

 वीणा के सुर खामोश हो रहे मेरी तमन्नाओं के कातिल बता तूने हमें वफा क्यों न दी।। कभी मांगा न

मेरे घर कि चौखट आज भी खुली

April 27, 2022

 मेरे घर कि चौखट आज भी खुली कभी तो तुम्हें भी मेरी याद आती ही होगी कभी तो मेरी याद

देखो हर शब्द में रब

April 27, 2022

 देखो हर शब्द में रब दिल को जीत लेते शब्द दिल को भेद भी देते शब्द दिल को बहलता मिठास

काट दिए मेरी कलम के पर

April 27, 2022

 काट दिए मेरी कलम के पर तमन्ना थी कभी खुद को , मैं खूब संवारूंगीसौलह श्रंगार करके , मैं खुद

मोहब्बत ए परवाना

April 27, 2022

मोहब्बत ए परवाना कहते हैं वो मोहब्बत ए परवाने , इस अंजुमन में रखा क्या हैतेरे हुस्न दीदार के बिना

Leave a Comment