Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

लेख-कहानी दान की/story of donation

कहानी दान की महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था और पांडवों ने युद्ध जीता था लेकिन खुशी नहीं थी …


कहानी दान की

महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था और पांडवों ने युद्ध जीता था लेकिन खुशी नहीं थी क्योंकि अपनों को खो कर जीती बाजी दुःख देने वाली थी।
वैसे भी हमारे धर्म में खुशी मिलने पर हम यज्ञ, पूजा और दान–दक्षिणा कर के खुशी व्यक्त की जाती हैं।तो राजसूय यज्ञ करके युधिष्ठिर ने बहुत दान दक्षिणा दी लोग वह वाही करने लगे।अन्न दान सब से महान होता हैं। मनों अनाज गरीबों में बांटा गया था, लोग खुशी खुशी सब ले कर अपने घर ले जा रहे थे।जब सब चले गए तब एक नेवले जैसा बड़ा सा प्राणी आया और जो अन्न बिखरा था उस में लौटने लगा तो सब हैरान हो गए।ये नेवले का आधा शरीर सोने का था और आधा जैसे नेवलों का होता हैं वैसा ही था।उसे देख सब हैरान हुए और बात महाराज युधिष्ठिर तक पहुंची तो वे भी वहां पहुंचे और हाथ जोड़ के उन्होंने उस से पूछा,” महाराज आप कौन हैं?आप ये दान के बिखरे अन्न में लोट क्यों रहे हो?” क्योंकि देखने में वह कोई शापित देवता सा लग रहा था,तो नेवले ने बताया कि वह उनके दोनों प्रश्नों का जवाब देगा।वह एक आम नेवला था और किसी के दान दिए अनाज में लोट कर उसका आधा शरीर सोने का हो गया था और युधिष्ठिर के दिए दान के बिखरे दानों पर लोट कर वह अपने शरीर का बाकी का हिस्सा भी सोने का करना चाहता था।लेकिन वह उनके दान से खुश नहीं था, लोट ने बावजूद उसका शरीर पूरा सोने का नहीं बन पाया।तब राजा युधिष्ठिर ने उस से वह महा दान के बारे में पूछा जिससे उसका आधा शरीर सोने का हो गया था।तब उसने कहा,” एक गरीब परिवार था।जिसमे पिता ,पुत्र ,माता और पुत्र वधु तीनों रहते थे।कुछ चार दिनों से उन्होंने कुछ नहीं खाया था और उस दिन उन्हे कुछ अन्न मिला तो उन्हों ने मिल बांट के खाने कि सोची और उनकी पत्नी और बहु खाना पका रही थी उतनी देर में कोई भूखा द्वार पर आया और उसने खाना खाने की इच्छा जताई तो पिता ने उसे अपने हिस्से का खाना उसे खिला दिया लेकिन वह तब भी तृप्त नहीं हुआ था माता ने अपना खाना उसे दे दिया और फिर भी वह तृप्त नहीं हुआ तो पुत्र ने भी अपना खाना उसे दे दिया लेकिन फिर भी वह तृप्त नहीं हुआ तो पुत्रवधु जो गर्भवती थी उसने भी अपना खाना उस भूखे को देना चाहा तब सब ने उसे देने से मना कर दिया क्योंकि उसे अपने गर्भ को भी पोषण देना था तो वह अपना खाना खुद खा ले तो अच्छा रहे लेकिन पुत्र वधु ने अपना खाना भी दे ही दिया और वह भूखा व्यक्ति खाना खा के तृप्त हो के चला गया।उस ने जहां खाना खाया था वहां मैं लोट कर आया तो वह कम था तो मेरा आधा शरीर सोने का बन गया और आधा सोने का हो जाएं इसलिए जहां जहां दान होता हैं वहां मैं जाता हूं और उस बिखरे अनाज में लोटता हूं लेकिन उसके जितना महान दानी कोई भी नहीं मिला जिससे मैं पूरा सोने का हो जाऊं।” उसकी बात सुन के दान बड़ा या छोटा उसकी मात्रा से नहीं हैं कि जो ज्यादा देता हैं वह बड़ा दानी हैं।युधिष्ठिर ने जो दान जो दान दिया था वह उसके धन जा एक छोटा सा हिस्सा था जबकि उस गरीब आदमी ने उसके पास जो भी था उसे दान किया था इसलिए उसका दान युधिष्ठिर से भी महान था।

About Author

जयश्री बिरमी सेवानिवृत शिक्षिका  अहमदाबाद

जयश्री बिरमी

सेवानिवृत शिक्षिका 
अहमदाबाद

Related Posts

Special on National Anti-Terrorism Day 21st May 2023.

May 20, 2023

उड़ी बाबा ! आतंकवादी , नक्सलवादी हमला ! राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस 21 मई 2023 पर विशेष। राष्ट्रीय हित के

आदर्श कारागार अधिनियम 2023| Aadarsh karagar adhiniyam

May 19, 2023

अब बच के रहियो रे बाबा , अब लद गए जेल में भी सुखनंदन के दिन ! आदर्श कारागार अधिनियम

UN releases Global Economic Situation and Prospects report

May 18, 2023

संयुक्त राष्ट्र 2023 की मध्य तक वैश्विक आर्थिक स्थिति और संभावनाएं रिपोर्ट जारी भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक चमकता स्थान

International family day 15 may 2023

May 16, 2023

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस 15 मई 2023 भारत में शिद्दत और सम्मान से मनाया गया विश्व में भारतीय परिवार जितनी पवित्रता,

गर्मी: आया मौसम हिट स्ट्रोक का

May 16, 2023

गर्मी: आया मौसम हिट स्ट्रोक का  गर्मी के मौसम में सामान्य रूप से गर्मी बढ़ जाती है। जिसके कारण आदमी

राजनीति का टर्निंग प्वाइंट| Turning point of politics

May 16, 2023

राजनीति का टर्निंग प्वाइंट सेवा और कल्याण की राजनीति से मिलता है वोट , पर्सेंट पोस्टर बैनर लगाने से नहीं?

PreviousNext

Leave a Comment