Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, poem

लाऊं तो कैसे और कहां से-जयश्री बिरमी

लाऊं तो कैसे और कहां से कहां से लाऊ वो उत्साह जो हर साल आता थाकहां से लाऊं वह जोश …


लाऊं तो कैसे और कहां से

लाऊं तो कैसे और कहां से-जयश्री बिरमी

कहां से लाऊ वो उत्साह जो हर साल आता था
कहां से लाऊं वह जोश जो हर साल आता था
तैयारी करते थे मनाने की जो नया साल
केक व खानी पीनी की बनती लंबी सूची हर हाल
वही सूची बनती थी अपनों और दोस्तों की
नहीं रहे बाकी कोई वरना उम्र भर सुनाएगा
अब कहां से लाऊं वो जजबा
सभी तो डरते हैं एकदूजे से जो कभी कसके मिलते थे
नहीं मिलेगी वो पाके जाफियां
जालिम जमाने छीन ली हैं नजदीकियां
अब सोचूं कि किस को बुलाऊं नए साल के जश्न में
कैद कर रखा हैं हमे इस शैतानी वक्त ने
अब क्रूर करोना के भाई की भी बारी हैं आई
उठ करोना अब ओमिक्रॉन की बारी हैं आई
मिलेंगे अब कैसे अपनों से इस भयंकर काल में
छूटे जा रहे हैं हसीन लम्हे जिंदगी के इस जंजाल में
पालन करने में दो गज की दूरी और मास्क के व्यवहार में
लाऊं कहां से……..???

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
निवृत्त शिक्षिका


Related Posts

अपने अपने राम

May 14, 2022

 अपने अपने राम जब भी कुमार विश्वास के प्रोग्राम का विज्ञापन देखती हूं जिसमे बड़े बड़े शब्दों में लिखा हैं”अपने

टूट रहे परिवार !

May 14, 2022

टूट रहे परिवार ! बदल गए परिवार के, अब तो सौरभ भाव ! रिश्ते-नातों में नहीं, पहले जैसे चाव !!

कविता-डिजिटल युग का नया डॉक्टर

May 11, 2022

कविता-डिजिटल युग का नया डॉक्टर चिंतक कवि, एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र आजकल कृत्रिम बुद्धिमता की लहर छाई है

डिजिटल डिटॉक्स

May 11, 2022

 डिजिटल डिटॉक्स  जयश्री बिरमी आजकल सुबह होती हैं मोबाइल में बजते अलार्म से और वहीं पर फोन हाथ में ले

कविता-उम्मीद

May 10, 2022

 उम्मीद  उदास रातों में उम्मीद की शमां जलाओ यारो  सन्नाटे की दीवारों पर खुशियां सजाओ यारो  फिर ये ख़ामोशी भी

घमासान

May 10, 2022

 घमासान क्यों हो रहीं हैं घुटन क्यों डर रहा हैं मन कहीं तो हो रहा हैं इंसानियत पर जुल्म घुट

PreviousNext

Leave a Comment