Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, poem

लहरों से दोस्ती महंगी पड़ी हुज़ूर ज्वार उठा ऐसा की तैरना जानते हुए भी शख्सियत मेरी किनारे लगी

 “लहरों से दोस्ती महंगी पड़ी हुज़ूर ज्वार उठा ऐसा की तैरना जानते हुए भी शख्सियत मेरी किनारे लगी” भावना ठाकर …


 “लहरों से दोस्ती महंगी पड़ी हुज़ूर ज्वार उठा ऐसा की तैरना जानते हुए भी शख्सियत मेरी किनारे लगी”

भावना ठाकर 'भावु' बेंगलोर
भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर

सराबोर समुन्दर के भीतर रेंगते हुए भी देह मेरी प्यासी थी बहुत ही प्यासी, ए खारे आब तुझसे मीठे की उम्मीद ही नहीं..

दम घुटने का शोर सुनाई देता है दरिया तुम्हें? काश ये रूदन तुम्हारे कर्ण पटल को बींधते आरपार होता..

उछल कर तुम्हारी दहलीज़ लाँघते बाहर निकल चुकी हूँ हल्की सी हलचल भी नहीं उठी तुम्हारी लहरों में..

आत्मा की अटारियों से लहरा रही हूँ पीड़ा का परचम, हल्की सी धूप की भूख लिए किनारों से दोस्ती कर ली..

बैठी हूँ इंतज़ार लिए आँखों में आदित्य का रथ गुज़रे इस राह से कभी, छोटे से जीव को आज़ाद साँसों का गहना दे जाए शायद..

ए समुन्दर तू तो लबालब है यहाँ गीली रेत में भी शीतलता नहीं, अहं के टीले से उतरकर देख तुझ में बसने वाले कितने अपूर्ण है..

भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर


Related Posts

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 25, 2022

कविता -मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम चतुर्भुज रूप में जन्म लियाअयोध्या को अनुराग दियामाँ कौशल्या के कहने परमूल रूप को त्याग दियाबाल्यकाल

जरा सोचो इंसान – मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी”

January 25, 2022

जरा सोचो इंसान अपनी जुबां से किसी को कभी ना सताना।मौत भी आकर कहे तो बहाना ये बनाना।।सम्भल कर कदम

माँ का आँचल- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 25, 2022

कविता -माँ का आँचल माँ एक बार फिर से मुझको,आँचल ओढ़ के सो जाने देबचपन की यादें ताज़ा हो जाएँ

अक्ल पर पत्थर मढ़े जाएं- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

अक्ल पर पत्थर मढ़े जाएं दुनिया में लोगों ने पहलेअपनी – अपनी आस्था के अनुसारमंदिर, मस्जिद, गिरजे, गुरुद्वारेऔर भी नाना

शीत लहर – डॉ. इन्दु कुमारी

January 25, 2022

शीत लहर है बड़ी शबाब परहाड़ कंपाने वालीअमीरों की कुछ नहै बिगाड़ने वालीगरीबों की झोपड़ीमें सनसनी फैलानेधाक जमाने वालीआहत करने

चाँद और मैं- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 25, 2022

चाँद और मैं अमावस की काली रातों मेंउलझी हुई कई बातों मेंन पूछ! किस तरहा रहते हैंचाँद और मैं एक

Leave a Comment