Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

लघुकथा -मानव संग्रहालय| Laghukatha- manav sangrahalay

मानव संग्रहालय साल 3050। फ्लाइंग कार पार्किंग में लैंड कर के रोबो परिवार के बाल रोबोट खिड़की की ओर दौड़े। …


मानव संग्रहालय

लघुकथा -मानव संग्रहालय| Laghukatha- manav sangrahalay

साल 3050। फ्लाइंग कार पार्किंग में लैंड कर के रोबो परिवार के बाल रोबोट खिड़की की ओर दौड़े। वहां सामने बोर्ड लगा था – ‘ह्युमन जू’ और टैगलाइन थी ‘जाति भूल चुकी मानवजात’। अंदर प्रवेश करते ही था दंभी लोगों का पिंजरा। इस पिंजरे में रहने वाले भौंहें चढ़ाए आने-जाने वालों को घूर रहे थे। पिंजरे के बोर्ड पर लिखा था कि मनुष्यों में यह जाति सब से अधिक देखने को मिलती है और ज्यादातर यह अन्य को तुच्छ मानती है। इसकी मुख्य खुराक है अपना बखान।
एक जैसे लग रहे दंभी मनुष्यों को देखना छोड़ रोबोट परिवार दूसरे पिंजरे की ओर पहुंचा, जो था लालची लोगों का पिंजरा। पिंजरे के बाहर से जू देखने आए रोबोट जैसे ही पैसा दिखाते, अंदर रहने वाले मनुष्य खुश हो जाते और रोबोट जो कहते, वह करने को तैयार हो जाते। एक सामान्य कागज के टुकड़े के लिए इस तरह पागल होते मनुष्यों को देख कर रोबोट परिवार को बहुत मजा आया। बाल रोबोट को वहां समय बिताना अच्छा लग रहा था, पर अभी उन्हें अन्य जाति के मनुष्यों को भी देखने जाना था।
खूंखार मनुष्यों के पिंजरे के सामने भीड़ अधिक थी। इसमें सब से खूंखार मनुष्य का पिंजरा अलग था। यह विश्वासघाती मनुष्यों की जाति थी। एक डिजिटल गाइड बता रहा था कि इस जाति से खूब संभल कर रहना। यह आप के साथ होगी, आप को लगेगा भी कि यह आप के साथ है, पर यह पीठ पीछे कब वार कर दे, आप को पता नहीं चलेगा। इनकी मुख्य खुराक अपने ही लोगों के साथ विश्वासघात करना है।
बीच में एक छोटा पिंजरा था, जिसमें सरिया की जगह कांच लगा हुआ था। ये ऐसे लोग थे, जिनमें आत्मविश्वास की कमी थी। ये लोगों के सामने आने से कतराते थे। ध्यान से देखने पर ही दिखाई देते थे। इसके पीछे उन लोगों का पिंजरा था, जो तंत्र-मंत्र और कुछ विचित्र विधियां करते थे। हर किसी की अंगुलियों में तरह-तरह की अंगूठियां और गले तथा कलाई में रंग-बिरंगे धागे बंधे थे। पिंजरे पर लगे बोर्ड पर लिखा था- मनुष्य की इस जाति को बहुत आसानी से मूर्ख बनाया जा सकता है।
इसके अलावा बिना वजह गाली देने वाले, लेडी रोबोट पर बुरी नजर डालने वाले, बात-बात में झगड़ने वाले तथा हर बात में झूठ बोलने वालों के पिंजरे थे।
रोबोट परिवार बाहर निकल रहा था, तभी रोबो गवर्नमेंट की ओर से घोषणा फ्लैश हुई।
हमें बनाने वाले मानवों से अच्छे गुणों को ले कर मानवता नाम की चिप बनाई गई है। हर रोबोट से निवेदन है कि अगर इस चिप को खरीद कर वह खुद में लगवाता है तो उसकी बैटरी लाइफ कमाल की हो जाएगी। रोबो परिवार खुशी से चिप खरीदने के लिए आगे बढ़ा। तभी लालची मनुष्यों के पिंचरे से कोई चिल्लाया, “चार चिप साथ खरीदना तो एक फ्री मांगना।”

About author 

वीरेन्द्र बहादुर सिंह जेड-436ए सेक्टर-12, नोएडा-201301 (उ0प्र0) मो-8368681336

वीरेन्द्र बहादुर सिंह
जेड-436ए सेक्टर-12,
नोएडा-201301 (उ0प्र0)
मो-8368681336


Related Posts

कविता-मैं तुम्हारी मीरा हूं| mai tumhari Meera hun.

January 15, 2023

कविता-मैं तुम्हारी मीरा हूं जहर का कटोरा पीने की हिम्मत हो,तभी कहना कि हे कृष्ण मैं तुम्हारी मीरा हूं।अगर प्यार

लघुकथा-जीवंत गजल | jeevant gazal

January 13, 2023

लघुकथा-जीवंत गजल हाथ में लिए गजल संध्या का आमंत्रण कार्ड पढ़ कर बगल में रखते हुए अनुज ने पत्नी से

कविता–मनुष्य | manushya par kavita

January 11, 2023

कविता–मनुष्य मनुष्य रंग बदलता मनुष्य,ढ़ंग बदलता मनुष्य। चाल बदलता मनुष्य, ढ़ाल बदलता मनुष्य। पल में फिरता मनुष्य, पल में विफरता

कविता–कृष्ण की व्यथा| krishna ki vyatha

January 9, 2023

कविता–कृष्ण की व्यथा क्या कृष्ण की कोई व्यथा नहीं थी? उनकी पीड़ा की कोई गाथा नहीं थी? छोड़ा गोकुल मैया

लघुकथा –काश मैं मोबाइल होती| kash mai mobile hoti

January 9, 2023

लघुकथा –काश मैं मोबाइल होती “आज काम बहुत था यार, बुरी तरह से थक गया हूं।” – सोफा पर अपना

अपाहिज | laghukatha -apaahij

January 6, 2023

अपाहिज !! अपाहिज | laghukatha -apaahij डॉ विनीता एक गांव में लगने वाली विकलांग शिविर के लिए घर से निकली

PreviousNext

Leave a Comment