Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

रूठे यार को मनाऊं कैसे-अंकुर सिंह

रूठे यार को मनाऊं कैसे रूठे को मैं कैसे मनाऊं, होती जिनसे बात नहीं,यादों में मैं उनके तड़पूउनको मेरा ख्याल …


रूठे यार को मनाऊं कैसे

रूठे यार को मनाऊं कैसे-अंकुर सिंह
रूठे को मैं कैसे मनाऊं,

होती जिनसे बात नहीं,
यादों में मैं उनके तड़पू
उनको मेरा ख्याल नहीं।।

कोई जाकर उन्हें बता दें,
उनके प्रेम में हम खोए है।
भेजे पुराने संदेश पढ़कर,
रात रात भर हम रोए है।।

कोई बता दें कैसे मना लूं,
होती जिनसे अब बात नहीं।
सच्चा प्रेम करता मैं उनसे,
भले उन्हें मेरा ख्याल नहीं।।

उन्हें खबर कोई ये कर दें,
मुझपे वो एक रहम कर दें।।
सुन ले मेरे दिल की बात,
ऐसा मुझपर तरस कर दें।

बिन किए दिल की बात,
दिल का हाल बताऊं कैसे।।
कोई तो इतना मुझे बता दें,
रूठे इस यार को मनाऊं कैसे ?

रूठना पर मुझसे बातें करना,
मुझको छोड़ तुम मत जाना।
था उनसे मेरा कुछ ऐसा वादा,
थोड़ा सता फिर वापस आना।।

कोई तो उनसे ये जाकर पूछे,
आखिर मैं प्यार बताऊं कैसे।।
जिस यार की चाहत हैं दिल में,
उस रूठे यार को मनाऊं कैसे ?

अंकुर सिंह
हरदासीपुर, चंदवक
जौनपुर, उ. प्र. -222129.
मोबाइल – 8367782654.
व्हाट्सअप – 8792257267


Related Posts

अनंत यात्रा

June 24, 2022

 अनंत यात्रा सुधीर श्रीवास्तव शून्य से शिखर तक जीवन की गतिमान यात्रा खुद को श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर होने का दंभ

कदम

June 24, 2022

 कदम सुधीर श्रीवास्तव हमें लगता है कि हमारे कदम किसी और को  प्रभावित नहीं करते , पर सच तो यह

व्यंग्य स्वार्थ के घोड़े

June 24, 2022

 व्यंग्यस्वार्थ के घोड़े सुधीर श्रीवास्तव आजकल का यही जमाना अंधे को दर्पण दिखलाना, बेंच देते गंजे को कंघा देखो! कैसा

डरने लगा हूँ मैं

June 24, 2022

 डरने लगा हूँ मैं सुधीर श्रीवास्तव वो छोटा होकर  कितना बड़ा हो गया है, बड़ा होकर भी बहुत छोटा हो

परिस्थितियां

June 24, 2022

 परिस्थितियां सुधीर श्रीवास्तव जीवन है तो परिस्थितियों से दो चार होना ही पड़ता है, अनुकूल हो या प्रतिकूल हमें सहना

मजदूरों का मान

June 24, 2022

 मजदूरों का मान सुधीर श्रीवास्तव माना कि हम मजदूर हैं पर मेहनत से जी नहीं चुराते, अपने काम में समर्पित

PreviousNext

Leave a Comment