Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh

रिश्तों की कद्र- अनीता शर्मा

 एक चिन्तन!!   * रिश्तों की कद्र* मैंने पिछले दिनों फेसबुक पर एक फोटो देखी जिसमें पिछले साल किसी कार्यक्रम में …


 एक चिन्तन!!
   * रिश्तों की कद्र*

रिश्तों की कद्र- अनीता शर्मा

मैंने पिछले दिनों फेसबुक पर एक फोटो देखी जिसमें पिछले साल किसी कार्यक्रम में माता पिता और अपने परिवार के साथ फोटो खींची गयी थी।मैं बहुत नजदीक से जानती हूँ , हमेशा अलग-अलग रहे आना-जाना,बातचीत भी बंद थी।पर हाँ बिछड़ने के पहले मेल मिलाप हो गया था।ईश्वर की कृपा ही है संतुष्टि से विदा हुए।

उन दोनो दम्पति की महज हफ्ते भर में मृत्यु हो गयी।पर एक बात अच्छी थी कि सभी बच्चे साथ थे।

     मन बहुत बेचैन हो जाता है ऐसे रिश्तों को देखकर।क्यों नहीं रिश्तों की कद्र होती जब वे जीवित रहते हैं।

    मनुष्य मन कमजोर पड़ जाता है।खो देने के बाद रोता है,याद करता है,पछताता भी है।पर ……समय निकल जाने के बाद।

      समय के साथ सीखता क्यों नहीं?शायद पिछले जन्म के कर्म ही ऐसे रहे होगे जो दूरी आई।

    पता नहीं नियति ने क्या संजोए रखा।

—–अनिता शर्मा झाँसी
—–मौलिक रचना


Related Posts

विज्ञान युद्ध बनाम धर्म युद्ध | Vigyan yuddh banam dharm yuddha

January 24, 2023

विज्ञान युद्ध बनाम धर्म युद्ध बाबा बनाम विज्ञान, कैसे निकलेगा समाधान! प्राचीन काल से भारतीय वेदों कतेबों में विज्ञान धर्म

गणतंत्र दिवस पर लेख | Republic day spacial

January 24, 2023

 नियम और कानून का पालन ही है सही ढंग से गणतंत्र दिवस मनाना 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस। इस दिन

बाबाओं का झूठा बल, अंधविश्वास का दलदल

January 24, 2023

बाबाओं का झूठा बल, अंधविश्वास का दलदल हमारा देश वैज्ञानिक दृष्टि से कितना पिछड़ा हुआ है, यह सब रोज-रोज के

बजट 1 फ़रवरी 2023 से उम्मीदें – मनी लांड्रिंग के 4 कानूनों में लीकेजेस उपाय ज़रूरी

January 24, 2023

बजट 1 फ़रवरी 2023 से उम्मीदें – मनी लांड्रिंग के 4 कानूनों में लीकेजेस उपाय ज़रूरी डिजिटल इंडिया भ्रष्टाचार और

भारत में विदेशी शिक्षण संस्थान नफ़ा या नुकसान

January 24, 2023

भारत में विदेशी शिक्षण संस्थान नफ़ा या नुकसान विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने की अनुमति देने का

ग्रामीण चौपालों को लील गई राजनीति

January 24, 2023

ग्रामीण चौपालों को लील गई राजनीति गांव मैं अब न तो पहले जैसे त्योहारों की रौनक है और न ही

PreviousNext

Leave a Comment