Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

रसेल और ओपेनहाइमर

यह कितना अद्भुत था और मेरे लिए अत्यंत सुखद— जब महान दार्शनिक और वैज्ञानिक रसेल और ओपेनहाइमर एक ही पथ …


यह कितना अद्भुत था
और मेरे लिए अत्यंत सुखद—
जब
महान दार्शनिक और वैज्ञानिक
रसेल और ओपेनहाइमर
एक ही पथ पर बढ़ चले—
दुनिया में शान्ति
और मानवता के कल्याण हेतु।

उन्होंने किया
परमाणु हथियारों का विरोध
और माँग की
अंतरराष्ट्रीय कानूनों की स्थापना की।

परन्तु
इन दोनों महान विभूतियों को
इस साहसिक रुख की
कठिन कीमत चुकानी पड़ी।

दोनों ही महान आत्माओं ने
आपस में
पत्र लिखे, संवाद किए
और साझा किया
मानवता का स्वप्न।

आज
जब दुनिया फिर से
युद्ध के जाल में उलझी हुई है
तो शान्ति और मानव कल्याण हेतु
हमें पुनः स्मरण करना होगा
रसेल और ओपेनहाइमर के
विचार, संदेश, और कर्तव्य।

-प्रतीक झा ‘ओप्पी’


Related Posts

आने वाला पल- सुधीर श्रीवास्तव

January 13, 2022

आने वाला पल आने वाला पल तो आकर ही रहेगा, जैसे जाने वाला पल भीभला कब ठहरा है ? क्योंकि

गुरु गोविंद पुकारा है – डॉ इंदु कुमारी

January 13, 2022

गुरु गोविंद पुकारा है तेग बहादुर सिंह ने अपने बेटे को बलिदान दिया झुका नहीं दुश्मन के आगेमौत को भी

व्याकुल अंतर- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

January 13, 2022

व्याकुल अंतर प्रीत निभाती रात गई बित , जोड़ जोड़ कर सपने-अपने,बंद आंखों में मिलन यामिनी ,हुई भोर तो साथ

कान्हा तू काहे करत मनमानी -सरस्वती मल्लिक

January 13, 2022

कविता : कान्हा तू काहे करत मनमानी कान्हा तू काहे करत मनमानी बार -बार समझाया तुझकोफिर भी एक न मानीनित

प्रेरणा- सुधीर श्रीवास्तव

January 13, 2022

प्रेरणा कहने सुनने में छोटा सा शब्द मगर भाव बड़ा है, किसी की अंधेरे में डूबती जिंदगी मेंउम्मीद की किरण

बता रहा है धुआँ – सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 7, 2022

शीर्षक – बता रहा है धुआँ आदमी अंदर और बाहर उड़ा रहा है धुआँ तिल -तिल फेफड़ों को सड़ा रहा

Leave a Comment