Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, kishan bhavnani, lekh

रक्षाबंधन 11 अगस्त 2022 पर विशेष

 ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।  तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।। रक्षाबंधन 11 अगस्त 2022 पर …


 ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:। 

तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

रक्षाबंधन 11 अगस्त 2022 पर विशेष

आओ रक्षाबंधन पर्व पर नारी के प्रति रक्षा की भावना का बंधन बढ़ाने का प्रण करें 

रक्षाबंधन को विस्तृत अर्थ में लेकर समाज में नारी को सुरक्षा देकर दृढ़, समृद्ध और सक्षम बनाने का प्रण लेकर मूल अस्तित्व से भटकने से बचाएं – एडवोकेट किशन भावनानी 

– वैश्विक स्तरपर भारत त्योहारों पर्वों उत्सवों भाषाओं मान्यताओं का अभूतपूर्व संगम वाला इकलौता देश है, इसलिए हर पर्व पर विश्व की नजरें भारत की खूबसूरत प्रथाओं की ओर हसरत भरी निगाहों से उठती है कि काश हम भी जीवन का इसी तरह लुत्फ उठाएं जिस तरह भारत पर खुशियों की बौछार होती है!! वैसे तो हर त्यौहार हम उमंग उत्साह के साथ मनाते ही हैं परंतु चूंकि 11 अगस्त 2022 को रक्षाबंधन उत्सव है इसलिए आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से रक्षाबंधन उत्सव पर चर्चा करेंगे 

साथियों बात अगर हम रक्षाबंधन उत्सव की करें तो यह भारत, नेपाल सहित कुछ देशों मे उत्साह से मनाया जाता है इसके इतिहास में जाएंगे तो इस पर्व की 326 ई पू से कलाई पर सूती धागा बांधने से शुरुआत हुई और इसके 1535 1905 सहित अनेक पर्वों के अनेक किस्म के इतिहास दर्ज हैं! परंतु इन किस्सों की पुष्टि नहीं की जा सकती तथापि इसके भाव को समझा जा सकता है कि यह धागा एक रक्षा का बंधन होता है जिसे पौराणिक काल से देवताओं द्वारा शिष्यों को रक्षा के लिए, पत्नी द्वारा पति के युद्ध में जाने पर उसकी सुरक्षा के लिए भी बांधे जाते थे और वक्त का पहिया चलते गया और आज इस पर्व को भाई बहन के त्योहार तक सीमित कर दिया गया है जिसमें बहन भाइयों को राखी बांधकर अपनी सुरक्षा समृद्धि रक्षा की अपेक्षा करती है और अभूतपूर्व खूबसूरत गिफ्ट भी दिया जाता है। 

साथियों बात अगर हम इस रक्षाबंधन के पौराणिक तर्ज पर विस्तृत व्याख्या में ले जाएं तो सबसे पहले युवा भारत के युवाओं को इस रक्षाबंधन के पौराणिक ऐतिहासिक उद्देश्यों को समझना होगा यह त्यौहार सिर्फ भाई-बहन तक सीमित नहीं है बल्कि नारी रक्षा का प्रण है पौराणिक कथाओं में हमने पड़े कि, कई जगह पर पत्नी अपने पति को राखी बांधती हैं. पति अपनी पत्नी को रक्षा का वचन देता हैं, सही मायने में यह त्यौहार नारी के प्रति रक्षा की भावना को बढ़ाने के लिए बनाया गया हैं। समाज में नारी की स्थिती कुछ हद्द तक गंभीर हैं क्यूंकि यह त्यौहार अपने मूल अस्तित्व से दूर हटता जा रहा हैं इसलिए जरुरत हैं इस त्यौहार के सही मायने को हम समझे एवम अपने आस पास के सभी लोगो को समझाएं, हम अपने बच्चो को इस लेन देन से हटकर इस त्यौहार की परम्परा समझायें तब ही आगे जाकर यह त्यौहार और भी अधिक खूबसूरत होगा, अगर असल मायने में इसे मनाना हैं तो इसमें से सबसे पहले सभी बहनों को अपने भाई को हर एक नारी की इज्जत करे, यह सीख देनी चाहिये। जरुरी हैं कि व्यवहारिक ज्ञान एवम परम्परा बढे तब ही समाज ऐसे गंदे अपराधो से दूर हो सकेगा।साथियों बात अगर हम वर्तमान परिपेक्ष में रक्षाबंधन त्यौहार की करें तो, यह त्योहार भाई-बहन को स्नेह की डोर में बांधता है। इस दिन बहन अपने भाई के मस्तक पर टीका लगाकर रक्षा का बन्धन बांधती है, जिसे राखी कहते हैं। यह एक हिन्दू व जैन त्योहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। श्रावण (सावन) में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी (सावनी) या सलूनो भी कहते हैं। 

साथियों बात अगर हम कुछ पौराणिक कथाओं को रक्षाबंधन से जोड़े तो, हम रक्षाबंधन के मूल उद्देश्य को समझ पाएंगे (1) सिकंदर और राजा पुरु – एक महान ऐतिहासिक घटना के अनुसार जब 326 ई पू में सिकंदर ने भारत में प्रवेश किया, सिकंदर की पत्नी रोशानक ने राजा पोरस को एक राखी भेजी और उनसे सिंकंदर पर जानलेवा हमला न करने का वचन लिया, परंपरा के अनुसार कैकेय के राजा पोरस ने युद्ध भूमि में जब अपनी कलाई पर बंधी वह राखी देखी तो सिकंदर पर व्यक्तिगत हमले नहीं किये  (2) रानी कर्णावती और हुमायूँ – एक अन्य ऐतिहासिक गाथा के अनुसार रानी कर्णावती और मुग़ल शासक हुमायूँ से सम्बंधित है, सन 1535 के आस पास की इस घटना में जब चित्तोड़ की रानी को यह लगने लगा कि उनका साम्राज्य गुजरात के सुलतान बहादुर शाह से नहीं बचाया जा सकता तो उन्होंने हुमायूँ, जो कि पहले चित्तोड़ का दुश्मन था, को राखी भेजी और एक बहन के नाते मदद माँगी, हालाँकि इस बात से कई बड़े इतिहासकार इत्तेफाक नहीं रखते, जबकि कुछ लोग पहले के दो समुदायों में एकता की बात इस राखी वाली घटना के हवाले से करते हैं।(3)1905 का बंग भंग और रविन्द्रनाथ टैगोर-भारत में जिस समय अंग्रेज अपनी सत्ता जमाये रखने के लिए ‘डिवाइड एंड रूल’ की पालिसी अपना रहे थे, उस समय रविंद्रनाथ टैगोर ने लोगों में एकता के लिए रक्षाबंधन का पर्व मनाया। वर्ष 1905 में बंगाल की एकता को देखते हुए ब्रिटिश सरकार बंगाल को विभाजित तथा दो विशेष समुदायों में सांप्रदायिक फूट डालने की कोशिश करती रही। इस समय बंगाल में और विशेष रुप से दो समुदायों में एकता बनाए रखने के लिए और देश भर में एकता का सन्देश देने के लिए रविंद्रनाथ टैगोर ने रक्षा बंधन का पर्व मनाना शुरू किया। 

साथियों बात अगर हम रक्षाबंधन के संस्कृति में श्लोकों की करे तो, ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।अर्थ जिस रक्षासूत्रसे महान शक्तिशाली राजा बलि को बांधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुम्हें बांधता हूं।हे रक्षे (राखी), तुम अडिग रहना। अपने रक्षा के संकल्प से कभी भी विचलित मत होना।

पश्येम शरद: शतं जीवेम शरद: शतं श्रुणुयाम शरद: शतंप्रब्रवाम शरद: शतमदीना: स्याम शरद: शतं भूयश्च शरद: शतात् रक्षाबन्धनस्य हार्दिक्य: शुभकामना:अर्थ मेरे भैया, सौ वर्षों तक आँखों का प्रकाश स्पष्ट बना रहे।आप सौ साल तक जीते रहें; सौ साल तक आपकी बुद्धि समर्थ रहे,आप ज्ञानी बने रहे; आप सौ साल तक बढ़ते रहें, और बढ़ते रहें;आपको पोषण मिलता रहे; आप सौ साल तक जीते रहें।

मम भ्राता!प्रार्थयामहे भव शतायु: ईश्वर सदा त्वाम् च रक्षतु।

पुण्य कर्मणा कीर्तिमार्जयजीवनम् तव भवतु सार्थकम् ।।अर्थ-मेरे भैया!प्रार्थना है की आप सौ साल जियें, ईश्वर सदा आपकी रक्षा करें,पुण्य कर्मों से कीर्ति अर्जित करें और इस तरह आपका जीवन सार्थक हो। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि रक्षाबंधन 11 अगस्त 2022 पर विशेष है, आओ रक्षाबंधन पर्व पर नारी के प्रति रक्षा की भावना बढ़ाने का प्रण करें। रक्षाबंधन को विस्तृत अर्थ में लेकर समाज में नारी को सुरक्षा देकर दृढ़ समृद्ध और सक्षम बनाने का प्रण लेकर मूल अस्तित्व से भटकने से बचाए।

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्रt

About author

Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

Related Posts

अमेरिका का बयान – दुनिया हैरान | America’s statement – the world was shocked

December 12, 2022

भारत अब अमेरिका का सिर्फ़ सहयोगी नहीं बल्कि तेज़ी से उभरती हुई विश्व की महाशक्ति है भारत तरक्की की बुलंदियों

व्यंग्य कविता -मासिक शासकीय पगार चौदह हज़ार है

December 12, 2022

 यह व्यंग्यात्मक कविता भ्रष्टाचार की हदें पार है?क्योंकि मेरा वेतन केवल चौदह हज़ार है।पर एक महीनें में मेरा खर्चा लाखों

कामकाजी महिला से रत्ती भर कमतर नहीं गृहिणी | housewife is not an iota less than a working woman.

December 11, 2022

“कहते है लोग वक्त ही वक्त है उसके पास, खा-पीकर टीवी ही देखती रहती है कहाँ कोई काम खास, करीब

शासकीय ठप्पे वाली वस्तुओं की हेराफेरी करता हूं | shaskeeye thappe wali vastuon ki heraferi karta hun

December 11, 2022

यह कविता अनाज सीमेंट इत्यादि शासकीय अलॉटमेंट वाली वस्तुओंं पर केंद्र या राज्य सरकार के ठप्पे लगे रहते हैं ।परंतु

क्या यह मूल्यों की कमी या लालच का प्रसार है, जो देश में भ्रष्टाचार की ओर ले जाता है?

December 10, 2022

क्या यह मूल्यों की कमी या लालच का प्रसार है, जो देश में भ्रष्टाचार की ओर ले जाता है? हमारे

भ्रष्टाचार की पोल खोलते रहेंगे| bhrastachar ki pol kholte rahenge

December 10, 2022

 यह  व्यंग्यात्मक कविता वर्तमान में असफ़ल हुए उम्मीदवारों और पार्टी के भाव कविता के माध्यम से प्रस्तुत है। व्यंग्य कविता–भ्रष्टाचार

Leave a Comment