Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

रंगबिरंगा त्यौहार!-डॉ. माध्वी बोरसे

रंगबिरंगा त्यौहार! रंगो का त्योहर हे होली,खुशियों से भरदे सबकी झोली,पकवान या मिठाई के जेसे,मीठी हो जाए सब की बोली। …


रंगबिरंगा त्यौहार!

रंगबिरंगा त्यौहार!
रंगो का त्योहर हे होली,
खुशियों से भरदे सबकी झोली,
पकवान या मिठाई के जेसे,
मीठी हो जाए सब की बोली।

सभी रंगो के रास में खेली,
राधा कृष्ण की प्रेम पहेली,
रंगबिरंगे पानी के साथ,
गुलाल, पिचकारी से जाति है खेली।

गीत, नाच और बहुत सारी मस्ती,
खेलें होली हर छोटी बड़ी हस्ती,
आओ बनाएं होली को और रंगभरा,
हर घर में शुभकामनाएं बरसती।

तो, बजा के ढोलक और मृदंग,
होली में भरदे परम उमंग,
खेले होली सबके संग,
जिंदगी में लाए नई तरंग,
जीवन में भर दे सारे रंग !!

डॉ. माध्वी बोरसे!
(स्वरचित व मौलिक रचना)

राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

बता रहा है धुआँ – सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 7, 2022

शीर्षक – बता रहा है धुआँ आदमी अंदर और बाहर उड़ा रहा है धुआँ तिल -तिल फेफड़ों को सड़ा रहा

कितनी हैरानी की बात है!- जितेन्द्र ‘कबीर

January 7, 2022

कितनी हैरानी की बात है! कितनी हैरानी की बात हैकि भौतिक जीवन की सार हीनता औरमृत्यु को सहज भाव से

नशा एक परछाई-जयश्री बिरमी

January 7, 2022

नशा एक परछाई क्यों चाहिए तुम्हे वो नशाजो तुम्हे और तुम्हारे प्यारोंको करता बरबाद हैं नशा करों अपने काम काया

द्विधा में लोकतंत्र- जयश्री बिरमी

January 7, 2022

 द्विधा में लोकतंत्र  विरोध किसका संस्कृति का? क्यों हमारे समाज में कोई भी प्रश्न नहीं होने के बावजूद प्रश्नों को

सुबह- चन्दा नीता रावत

January 7, 2022

। । सुबह ।। सुबह सवेरे जब रात ढले सूर्य की किरणें पृथ्वी पर आतीपृथ्वी के हरे चादर पर लालिमा

गगन की बुलन्दीयो को छुना- चन्दानीता रावत

January 7, 2022

गगन की बुलंदियों को छूना हैं  उड़ना है हमे उड़ना हैगंगन की बुलंदियों को छूना हैआँखो के हसीन ख्वाब कोवास्तविकता कर जीना

Leave a Comment