Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veena_advani

ये ना समझो पाठकों

अरे ! लोग कहते जख़्मी दिल जिसकावही तो दर्द-ए शायर/शायरा होता है।।ज़ख़्मी दिल रोए उसका ज़ार-ज़ार जबतब कलम का हर …


अरे ! लोग कहते जख़्मी दिल जिसका
वही तो दर्द-ए शायर/शायरा होता है।।
ज़ख़्मी दिल रोए उसका ज़ार-ज़ार जब
तब कलम का हर शब्द धारदार होता है।।

पढ़े जो पाठक उसके हर एक शब्द जब
शब्द महसूस कर दर्द पाठक को होता है
पाठक सोचे शायर/शायरा को दर्द इतना
ना जाने वो ये दर्द कैसे , क्यों सहता है।।

अरे सुनों ! जरूरी नहीं दर्द लिखे जो
वो दिन/रात दर्द में रह कर बहता है।।
लिख दर्द लूटी वाहवाही कभी शायर ने
पाठकों के दिये नाम दर्द-ए शायर को संजोता है।।

जज़्बात में डूबे रूह से जो शायर/शायरा
हर विषय में गोते लगा वो खुश होता है
ये ना समझो लिखे जो जिस विद्या में
वो सिर्फ उसी में पारंगत शायर/शायरा होता है।।

याद रखना शायर/शायरा
श्रृंगार , वीर , दर्द , औजस्व , हास्य रस
हर रस के विषय पर कलम चला खोता है।।
दिन रात शब्दों , जज़्बातों , ख्याली पुलावों में जो खोए
समझो वही तो शायर होता है।।२।।

About author 

Veena advani

वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर , महाराष्ट्र



Related Posts

प्रेरणा- सुधीर श्रीवास्तव

January 13, 2022

प्रेरणा कहने सुनने में छोटा सा शब्द मगर भाव बड़ा है, किसी की अंधेरे में डूबती जिंदगी मेंउम्मीद की किरण

बता रहा है धुआँ – सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 7, 2022

शीर्षक – बता रहा है धुआँ आदमी अंदर और बाहर उड़ा रहा है धुआँ तिल -तिल फेफड़ों को सड़ा रहा

कितनी हैरानी की बात है!- जितेन्द्र ‘कबीर

January 7, 2022

कितनी हैरानी की बात है! कितनी हैरानी की बात हैकि भौतिक जीवन की सार हीनता औरमृत्यु को सहज भाव से

नशा एक परछाई-जयश्री बिरमी

January 7, 2022

नशा एक परछाई क्यों चाहिए तुम्हे वो नशाजो तुम्हे और तुम्हारे प्यारोंको करता बरबाद हैं नशा करों अपने काम काया

द्विधा में लोकतंत्र- जयश्री बिरमी

January 7, 2022

 द्विधा में लोकतंत्र  विरोध किसका संस्कृति का? क्यों हमारे समाज में कोई भी प्रश्न नहीं होने के बावजूद प्रश्नों को

सुबह- चन्दा नीता रावत

January 7, 2022

। । सुबह ।। सुबह सवेरे जब रात ढले सूर्य की किरणें पृथ्वी पर आतीपृथ्वी के हरे चादर पर लालिमा

Leave a Comment