Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

युवा शक्ति और उचित मार्गदर्शन (बुजुर्गों) की भागीदारी बढ़ाएं

युवा शक्ति प्लस बुजुर्ग अनुभव इक्वल टू गैरेंटेड सक्सेस आओ पीढ़ियां हाथ मिलाए, एक नया इतिहास रचें आओ युवा शक्ति …


युवा शक्ति प्लस बुजुर्ग अनुभव इक्वल टू गैरेंटेड सक्सेस

आओ पीढ़ियां हाथ मिलाए, एक नया इतिहास रचें

आओ युवा शक्ति और उचित मार्गदर्शन (बुजुर्गों) की भागीदारी बढ़ाएं

युवा शक्ति और उचित मार्गदर्शन (बुजुर्गों) की भागीदारी बढ़ाएं

विकास के मार्ग में बाधाओं को तोड़ने, युवा शक्ति और उचित मार्गदर्शन की भागीदारी से भारत को फिर सोने की चिड़िया का दर्जा हासिल हो सकता है – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर अगर तजुर्बेदार, बड़ों, अनुभवी ताउम्र लोगों और बड़े बुजुर्गों का मान सम्मान, एकजुटता की बात करें तो आदि अनादि काल से यह भारत में रही है क्योंकि भारत की संस्कृति सभ्यता और यहां की मिट्टी में ही ऐसे गुणों की खान है जो जन्म से ही प्राणी के दिलों दिमाग में बस जाती है। परंतु वर्तमान परिपेक्ष में पश्चिमी संस्कृति के सैलाब में इस उचित मार्गदर्शन की भागीदारी का कमजोर होना रेखांकित किया जा सकता है। जबकि आधुनिक नवीनतम नए भारत में युवाओं की संख्या तीव्रता से बढ़ रही है इसलिए इसलिए आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से युवा शक्ति और हमारे बड़ों, अनुभवी, ताउम्र लोगों,याने अंतर पीढ़ी गत एकजुटता को कायम करने पर चर्चा करेंगे।
सथियों बात अगर हम वर्तमान परिपेक्ष में भारत की युवा शक्ति की करें तो, भारत युवाओं का देश हैं, पूरे विश्व में भारत को युवाओं का देश कहा जाता है। हमारे देश में 35 वर्ष की आयु तक के 65 करोड़ युवा हैं। अर्थात् हमारे देश में अथाह श्रमशक्ति उपलब्ध है। आवश्यकता है आज हमारे देश की युवा शक्ति को उचित मार्ग दर्शन देकर उन्हें देश की उन्नति में भागीदार बनाने की, उनमे अच्छे संस्कार, उचित शिक्षा एवं प्रोद्यौगिक विशेषज्ञ बनाने की, उन्हें बुरी आदतों जैसे- नशा, जुआ, हिंसा इत्यादि से बचाने की। क्योंकि चरित्र निर्माण ही देश की, समाज की, उन्नति के लिए परम आवश्यक है। दुश्चरित्र युवा न तो अपना भला कर सकता है, न समाज का और न ही अपने देश का। देश के निर्माण के लिए, देश की उन्नति के लिए, देश को विश्व के विकसित राष्ट्रों की पंक्ति में खड़ा करने के लिए युवा वर्ग को ही मेधावी, श्रमशील, देश भक्त और समाज सेवा की भावना से ओत प्रोत होना होगा।
साथियों बात अगर हम देश के युवाओं को विलासिता सुख सुविधा के मोह में देश की जमीन छोड़कर प्रवासन की करें तो, आज विश्वभर में अधिकतर युवा विलासिता और सुख-सुविधा को देखते हुए अपनी देश की जमीन को छोड़कर दूसरी जगह जा रहे हैं, जिससे राष्ट्र निर्माण में दिक्कतें आ रही हैं। युवा किसी भी राष्ट्र की शक्ति होते हैं और विशेषकर भारत जैसे महान् राष्ट्र की ऊर्जा तो युवाओं में ही निहित है। ऐसे में अगर युवाओं का भारी संख्या में प्रवासन होता है तो इससे न केवल उस राष्ट्र की अक्षमता प्रदर्शित होती है, जो अपने नौजवानों को पर्याप्त साधन नहीं दे सकता बल्कि इससे देश की विकास का सशक्त आधार भी समाप्त हो जाता है।
साथियों इसलिए युवाओं को चाहिए कि अपनी क्षमता का लाभ अपनी मिट्टी में से जुड़कर देश सेवा में हाथ बताएं इसलिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी कहा है, इस महत्वपूर्ण दिन पर, बाधाओं को तोड़ने के लिए पीढ़ियों से हाथ मिलाएं, और सभी लोगों के लिए एक अधिक न्यायसंगत, न्यायपूर्ण और समावेशी दुनिया प्राप्त करने के लिए एक के रूप में काम करें।
साथियों बात अगर हम वर्तमान मानव विकास गति की करें तो, वर्तमान सदी में युवा वर्ग मानव सभ्यता के ऐसे मुकाम पर खड़ा है, जब मानव विकास गति का रथ जेट विमान की गति से भाग रहा है। यह तीव्र विकास गति जहाँ अनेकों उपलब्धियां सुविधाएँ और चमत्कार लेकर आ रही है, वहीँ युवा वर्ग के लिए तीव्र गति से भागने की क्षमता पा लेने की चुनौती भी। क्योंकि यदि युवा वर्ग इतना क्षमतावान है की वह तेज़ीसे हो रहे परिवर्तन को समझ सके, उसे अपना सके,नयी खोजों नयी तकनीकों की जानकारी प्राप्त कर अपनी कार्यशैली परिवर्तित कर सके, तो ही वह अपने जीवन को सम्मानजनक एवं सुविधा संपन्न बना सकता है, और विश्व स्तर पर अपने अस्तित्व को बनाये रख सकता हैप्रतिस्पर्द्धा की कड़ी चुनौतियों को स्वीकार करना ही सुरक्षित भविष्य की गारंटी है। आज के युवा वर्ग को विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्द्धा में शामिल होना आवश्यक हो गया है।
साथियों बात अगर हम युवाओं द्वारा अपने समय के सदुपयोग के मूल्यों की करें तो, आज के युवा वर्ग को अपने विद्यार्थी जीवन में अध्ययनशील, संयमी, चरित्र निर्माण के लिए आत्मानुशासन लाकर अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने के प्रयास करने चाहिए। जिसके लिए समय का सदुपयोग आवश्यक है। विद्यालय को मस्ती की पाठशाला समझ कर समय गंवाने वाले युवा स्वयं अपने साथ अन्याय करते हैं, जिसकी भारी कीमत जीवन भर चुकानी पड़ती है। बिना शिक्षा के कोई भी युवा अपने जीवन को सुचारू रूप से चलाने में अक्षम रहता है। चाहे उसके पास अपने पूर्वजों का बना बनाया, स्थापित कारोबार ही क्यों न हो। या वह किसी राजनयिक या प्रशासनिक अधिकारी की संतान ही क्यों न हो। इसी प्रकार बिना शिक्षा के जीवन में कोई भी कार्य, व्यापार, व्यवसाय उन्नति नहीं कर सकता। यदि कोई युवा अपने विद्यार्थी जीवन के समय का सदुपयोग कर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है तो मनोरंजन, मस्ती और ऐश के लिए पूरे जीवन में भरपूर अवसर मिलते हैं। वर्तमान समय में युवा विद्यार्थियों को रोजगार परक शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए, अर्थात् प्रोद्यौगिकी से सम्बंधित विषयों में विशेषज्ञता प्राप्त करनी चाहिए। जो देश की उन्नति में योगदान देने के साथ-साथ रोजगार की असीम संभावनाएं दिलाती है।
साथियों बात अगर हम वैश्विक युवा शक्ति की करें तो, युवा विकास के लिए एक सकारात्मक शक्ति हो सकते हैं जब उन्हें ज्ञान और अवसर प्रदान किए जाते हैं जिनकी उन्हें आवश्यकता होती है। आज, 15 से 24 वर्ष की आयु के 1.2 अरब युवा हैं, जो वैश्विक आबादी का 16 प्रतिशत है। 2030 तक – 2030 एजेंडा बनाने वाले सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के लिए लक्ष्य तिथि – युवाओं की संख्या 7 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.3 बिलियन होने का अनुमान है, हमारे ग्रह पर आधे लोग 30 या उससे कम उम्र के हैं, और यह 2030 के अंत तक 57 फ़ीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है।सर्वेक्षण से पता चलता है कि 67 फ़ीसदी लोग बेहतर भविष्य में विश्वास करते हैं, जिसमें 15 से 17 वर्ष के बच्चे इस बारे में सबसे अधिक आशावादी हैं।अधिकांश लोग इस बात से सहमत हैं कि राजनीति में उम्र का संतुलन गलत है। सभी आयु समूहों के दो तिहाई (69 फ़ीसदी) से अधिक लोग इस बात से सहमत हैं कि नीति विकास/परिवर्तन में युवा लोगों के लिए अधिक अवसर राजनीतिक व्यवस्था को बेहतर बनाएंगे। विश्व स्तर पर, केवल 2.6 फ़ीसदी सांसद 30 वर्ष से कम उम्र के हैं, और इनमें से 1 फ़ीसदी से भी कम युवा सांसद महिलाएं हैं।
साथियों बात अगर हम युवाओं को इस हेतु प्रोत्साहन की करें तो इस संदेश को बढ़ाना है कि सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने के लिए सभी पीढ़ियों के लिए कार्रवाई की आवश्यकता है और किसी को पीछे नहीं छोड़ना है। यह अंतर-पीढ़ीगत एकजुटता, विशेष रूप से आयुवाद, जो युवा और वृद्ध व्यक्तियों को प्रभावित करता है, के लिए कुछ बाधाओं पर जागरूकता बढ़ाएगा, जबकि समग्र रूप से समाज पर हानिकारक प्रभाव पड़ेगा। देश के युवाओं की आवाज, कार्यों और उनके द्वारा किए गये आविष्कार को देश–दुनिया तक पहुंचाना है। युवाओं की समस्या को अन्तर्राष्ट्रीय संगठन जैसे संयुक्त राष्ट्र , मानवाधिकार तक पहुंचाना है। कोरोना के बाद पहली बार अन्तर्राष्ट्रीय युवा दिवस कार्यक्राम आयोजित हुए है, विभिन्न मुद्दे पर चर्चा हुई और राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दे में अपनी चर्चा की।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि आओ पीढ़ियां हाथ मिलाए एक नया इतिहास रचें। आओ युवा शक्ति और उचित मार्गदर्शन (बुजुर्गों) की भागीदारी बढ़ाएं विकास के मार्ग में बाधाओं को तोड़ने युवा शक्ति और उचित मार्गदर्शन की भागीदारी से भारत को फिर सोने की चिड़िया का दर्जा हासिल हो सकता है।

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 

Related Posts

Lekh man ki hariyali by sudhir Srivastava

July 31, 2021

 लेखमन की हरियाली, लाए खुशहाली     बहुत खूबसूरत विचार है ।हमारे का मन की हरियाली अर्थात प्रसन्नता, संतोष और

Lekh by kishan sanmukh das bhavnani

July 31, 2021

 सत्य वह दौलत है जिसे पहले खर्च करो, जिंदगी भर आनंद पाओ- झूठ वह कर्ज़ है, क्षणिक सुख पाओ जिंदगी

janmdin jeevanyatra by Maynuddin Kohri

July 25, 2021

जन्मदिन —- जीवनयात्रा  आजादी के बाद के काले बादल छट जाने के बाद देश मे अमन चैन,गणतन्त्र भारत की सुखद

Guru govind dono khade kako lagu paye by jayshri birmi

July 23, 2021

गुरु गोविंद दोनो खड़े काको लागू पाए अपने देश में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊंचा कहा गया है।

Naari gulami ka ek prateek ghunghat pratha by arvind kalma

July 23, 2021

नारी गुलामी का एक प्रतीक घूंघट प्रथा भारत में मुगलों के जमाने से घूँघट प्रथा का प्रदर्शन ज्यादा बढ़ा क्योंकि

OTT OVER THE TOP Entertainment ka naya platform

July 23, 2021

 ओटीटी (ओवर-द-टॉप):- एंटरटेनमेंट का नया प्लेटफॉर्म ओवर-द-टॉप (ओटीटी) मीडिया सेवा ऑनलाइन सामग्री प्रदाता है जो स्ट्रीमिंग मीडिया को एक स्टैंडअलोन

Leave a Comment