Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

deshbhakti, kishan bhavnani, lekh

यह भारत देश है मेरा| yah Bharat desh hai mera

यह भारत देश है मेरा पहली बार कर्तव्य पथ पर दुनिया ने देखी हिंदुस्तान की विराट ताक़त, रचा गया इतिहास …


यह भारत देश है मेरा

यह भारत देश है मेरा| yah Bharat desh hai mera

पहली बार कर्तव्य पथ पर दुनिया ने देखी हिंदुस्तान की विराट ताक़त, रचा गया इतिहास

भारत ने पूरी दुनिया के सामने अपने शौर्य, सांस्कृतिक विरासत, सैन्य क्षमता और अपनी शानदार ताक़त और दम का प्रदर्शन किया – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत ने 26 ज़नवरी 2023 को पहली बार कर्तव्य पथ पर परेड कर दुनिया को अपना दम ताकत और आत्मनिर्भर भारतकी गाथा सहित 23 झांकियों का प्रदर्शन कर इतिहास रचा, जिसे सारी दुनिया ने हैरत भरी नज़रों से देखा कि इतनी तेजी से भारत विकास के झंडे गाड़कर आगे बढ़ रहा है, इसकी प्रेरणा दुनिया के तमाम विकासशील देशों ने लेना चाहिए ताकि जिसका ज़ज्बा जांबाज़ी और हसरतें हो तो सफ़लताज़रूर सलामी ठोकती है,जिसका सापेक्ष उदाहरण आज भारत है। 74 वें गणतंत्र दिवस परेड 2023 में इस बार मिस्त्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सिसी रहे और परेड में भी वहां की सैनिकटुकड़ी शामिल हुई। सबसे खूबसूरत रहा स्वदेशी हथियारों का डिस्प्ले, लाइट कंबैक्ट टेलेकॉस्टरार डेयरडेविल्स की टीम को महिला अफसर ने लीड किया। परंतु रेलवे मंत्रालय और पंजाब की झांकी नहीं दिखी, विशेषता यह थी कि कोरोना से पहले करीब सवा लाख लोग परेड में शामिल होते थे परंतु अभी करीब पैतालीस हजार शामिल हुए क्योंकि कोरोना अभी गया नहीं है जिसे करीब12 हज़ार पासेस और 32 हज़ार टिकटें ऑनलाइन बिके थे जो,20, 100 और 500 प्रति टिकट शुल्क के थे। इस बार दर्शकों के बैठने की व्यवस्था के लिए अलग से इंतजाम किया गया था क्योंकि 26 जनवरी 2023 को पहली बार गणतंत्र दिवस कर्तव्य पथ पर दुनिया ने देखा, हिंदुस्तान की विराट ताकत, क्योंकि स्वदेशी सैन्य साधनों का शानदार प्रदर्शन था इतिहास रचा गया। इसलिए आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, यह भारत देश है मेरा, जहां डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा यह भारत देश है मेरा।
साथियों बात अगर हम इतिहास रचने की करें तो,कर्तव्य पथ इस बार देश ने इतिहास बनते देखा, देश में पहली बार आदिवासी महिला राष्ट्रपति ने परेड की सलामी ली। उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और उसके बाद 21 तोपों की सलामी के साथ राष्ट्रगान हुआ। राष्ट्रपति ने कर्तव्य पथ से राष्ट्र का नेतृत्व किया। इस बार गणतंत्र दिवस पर मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी मुख्य अतिथि थे। इससे पहले पीएम ने वॉर मेमोरियल पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उनके साथ रक्षा मंत्री, सीडीएस, तीनों सेनाओं के सेना प्रमुख मौजूद रहे। इसके बाद पीएम कर्तव्य पथ पहुंचे, यहां उन्होंने राष्ट्रपति का स्वागत किया। इस मौके पर कर्तव्य पथ परेड निकाली गई, इस परेड में भारत का स्वदेशी सैन्य पराक्रम और नारी शक्ति की ताकत नजर आई। कर्तव्य पथ पर आकाश मिसाइल, अर्जुन टैंक जैसे घातक हथियारों ने सेना के शौर्य को दिखाया, आसमान में प्रचंड और राफेल समेत 50 विमानों की उड़ान ने सीमाओं से परे भारतीय वायु सेना की शक्ति प्रदर्शित की. ये दृश्य हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा करने वाला रहा। 90 मिनट की परेड में 23 झांकियां भी दिखीं. इनमें राज्यों की और मंत्रालयों विभागों की झांकियां शामिल रहीं। जहां यूपी की झांकी में अयोध्या की झलक दिखी, तो वहीं गृह मंत्रालय द्वारा नशा मुक्त भारत की झांकी और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की झांकी में ‘नारी शक्ति’ को दर्शाया गया।आखिर में भारतीय सेनाओं के 50 विमानों ने फ्लाई पास्ट किया।
साथियों बातअगरहम ऐतिहासिक वंदे भरतम कार्यक्रम की करें तो, संस्कृति मंत्रालय का सांस्कृतिक कार्यक्रम वंदे भारतम कार्यक्रम आज नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय गणतंत्र दिवस समारोह में प्रमुख आकर्षणों में से एक रहा। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता से चुने गए 479 कलाकारों ने ‘नारी शक्ति’ विषय पर पूरे देश के सामने प्रदर्शन किया। भव्य परेड के दौरान, कलाकारों ने अपने जीवंत और ऊर्जावान प्रदर्शन के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और एक भारत, श्रेष्ठ भारत की सच्ची भावना में भारत की विविध सांस्कृतिक एवं कलात्मक विरासत को प्रदर्शित किया। गणतंत्र दिवस समारोह में आज कर्तव्य पथ पर संस्कृति मंत्रालय की ‘शक्ति रूपेण संस्थिता’ शीर्षक वाली रंगीन झांकी भी दिखाई गई। झांकी देवी के ‘शक्ति’ रूप पर आधारित है। इस झांकी के माध्यम से कई लोकनृत्यों को एक मंच पर उतारा गया।
साथियों बात अगर हम गणतंत्र दिवस के महत्व की करें तो 26 जनवरी 1950 को भारत पूर्ण गणराज्य बना। गणतंत्र दिवस राष्ट्र के लिए गणतंत्र के योगदान को दर्शाता है। यह दिन राष्ट्र को बनाए रखने में सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं को भी श्रद्धांजलि देता है। पहली बार गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को मनाया गया था।भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इस दिन 21 तोपों की सलामी के साथ ध्वजारोहण किया था और भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया था, तब से हर साल 26 जनवरी को देश में गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। भारत का संविधान पूरी दुनिया में सबसे लंबा लिखित संविधान है। मूल रूप से इसमें 395 लेख थे, जो 22 भागों और 8 अनुसूचियों में विभाजित थे। भारत के संविधान के अनुसार भारत एक संप्रभु समाजवादी धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य है, जो अपने नागरिकों को न्याय, समानता और स्वतंत्रता का आश्वासन देता है, और उनके बीच बंधुत्व को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
साथियों बात अगर हम गणतंत्र दिवस मनाने के कारणों की करें तो, हमारा यह बुनियादी दस्तावेज दुनिया की सबसे प्राचीन जीवंत सभ्यता के मानवतावादी दर्शन के साथ-साथ आधुनिक विचारों से भी प्रेरित है। हमारा देश बाबासाहब भीमराव आम्बेडकर का सदैव ऋणी रहेगा, जिन्होंने प्रारूप समिति की अध्यक्षता की और संविधान को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज के दिन हमें संविधान का प्रारंभिक मसौदा तैयार करने वाले विधिवेत्ता श्री बी.एन. राव तथा अन्य विशेषज्ञों और अधिकारियों को भी स्मरण करना चाहिए जिन्होंने संविधान निर्माण में सहायता की थी। हमें इस बात का गर्व है कि उस संविधान सभा के सदस्यों ने भारत के सभी क्षेत्रों और समुदायों का प्रतिनिधित्व किया। संविधान निर्माण में सभा की 15 महिला सदस्यों ने भी योगदान दिया। संविधान में निहित आदर्शों ने निरंतर हमारे गणतंत्र को राह दिखाई है। इस अवधि के दौरान, भारत एक गरीब और निरक्षर राष्ट्र की स्थिति से आगे बढ़ते हुए विश्व-मंच पर एक आत्मविश्वास से भरे राष्ट्र का स्थान ले चुका है।संविधान निर्माताओं की सामूहिक बुद्धिमत्ता से मिले मार्गदर्शन के बिना यह प्रगति संभव नहीं थी बाबासाहब आम्बेडकर और अन्य विभूतियों ने हमें एक मानचित्र तथा एक नैतिक आधार प्रदान किया। उस राह पर चलने की जिम्मेदारी हम सब की है। हम काफी हद तक उनकी उम्मीदों पर खरे उतरे भी हैं, लेकिन हम यह महसूस करते हैं कि गांधीजी के ‘सर्वोदय’ के आदर्शों को प्राप्त करना अर्थात सभी का उत्थान किया जाना अभी बाकी है। फिर भी, हमने सभी क्षेत्रों में उत्साहजनक प्रगति हासिल की है।

 
साथियों बात अगर हम गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस में फ़र्क की करें तो, गणतंत्र दिवस पर देश अपनी सैन्य ताकत और सांस्कृतिक विलक्षणता को दिखाता है। जबकि स्वतंत्रता दिवस के दिन ऐसा कुछ नहीं होता।26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के दिन समारोह में मुख्य अतिथि आते हैं। जबकि स्वतंत्रता दिवस पर ऐसा नहीं होता है।26 जनवरी और 15 अगस्त दोनों ही राष्ट्रीय पर्व हैं।भारत ने 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्त की लेकिन यह 1950 तक एक गणतंत्र नहीं था जब देश का संविधान अंततः अपनाया गया था, राष्ट्र को गणतंत्र घोषित किया गया था।

 
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि यह भारत देश है मेरा। पहली बार कर्तव्य पत्थर पर दुनिया ने देखी हिंदुस्तान की विराट ताकत, रचा गया इतिहास। भारत ने पूरी दुनिया के सामने अपने शौर्य, सांस्कृतिक विरासत,सैन्य क्षमता, अपनी शानदार ताकत और दम का प्रदर्शन किया।

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 


Related Posts

Khud ko hi sarvshreshth na samjhe by Sudhir Srivastava

October 22, 2021

 खुद को ही सर्वश्रेष्ठ न समझें                         ✍ सुधीर

Kitne ravan jalayenge hum ? By Jayshree birmi

October 15, 2021

 कितने रावण जलाएंगे हम? कईं लोग रावण को महान बनाने की कोशिश करतें हैं,यह कह कर माता सीता के हरण

Aaj ka kramveer by Jay shree birmi

October 12, 2021

 आज का कर्मवीर जैसे हम बरसों से जानते हैं फिल्मी दुनियां में सब कुछ अजीब सा होता आ रहा हैं।सभी

Chalo bulava aaya hai by Sudhir Srivastava

October 12, 2021

 संस्मरणचलो बुलावा आया है       वर्ष 2013 की बात है ,उस समय मैं हरिद्वार में लियान ग्लोबल कं. में

Online gaming by Jay shree birmi

October 12, 2021

 ऑनलाइन गेमिंग करोना  के जमाने में बहुत ही मुश्किलों में मोबाइल ने साथ दिया हैं छोटी से छोटी चीज ऑन

Humsafar by Akanksha Tripathi

October 8, 2021

हमसफ़र  👫💞 ये नायाब रिश्ता वास्तविक रूप से जबसे बनता है जिंदगी के अंतिम पड़ाव तक निभाया जाने वाला रिश्ता

Leave a Comment