भावनानी के भाव
मौत का मुल्यांकन | maut ka mulyankan
भावनानी के भाव मौत का मुल्यांकन मैंने भी सोचा हम तो यूं ही जिंदगी जिए जा रहे हैं बेकार मौत …
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अक्ल पर पत्थर मढ़े जाएं दुनिया में लोगों ने पहलेअपनी – अपनी आस्था के अनुसारमंदिर, मस्जिद, गिरजे, गुरुद्वारेऔर भी नाना
शीत लहर – डॉ. इन्दु कुमारी
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शीत लहर है बड़ी शबाब परहाड़ कंपाने वालीअमीरों की कुछ नहै बिगाड़ने वालीगरीबों की झोपड़ीमें सनसनी फैलानेधाक जमाने वालीआहत करने
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चाँद और मैं अमावस की काली रातों मेंउलझी हुई कई बातों मेंन पूछ! किस तरहा रहते हैंचाँद और मैं एक
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सलोनी के कुसुम”- अनिता शर्मा झाँसी
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सलोनी के कुसुम” इंसान बेइन्तहा मजबूर दिखा,कुसुम सी बालिकाएं तीर्थ पर,बेंच रही पूजा का सामान छोली में।चेहरे पर मुस्कान बिखेरी

