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kishan bhavnani, poem

मौत का मुल्यांकन | maut ka mulyankan

 भावनानी के भाव मौत का मुल्यांकन मैंने भी सोचा हम तो यूं ही जिंदगी  जिए जा रहे हैं बेकार  मौत …


 भावनानी के भाव

मौत का मुल्यांकन

मौत का मुल्यांकन | maut ka mulyankan
मैंने भी सोचा हम तो यूं ही जिंदगी 
जिए जा रहे हैं बेकार 
मौत ज़िन्दगी से हसीन होती है 
सहानुभूति साथ सम्मान तारीफ़ की जा रही है 
आज एक गरीब की मौत से पता चला 
मौत कितनी हसीन होती है 
जिससे बारे में बात करना पसंद नहीं था 
लोग उसकी तारीफ़ कर रहे थे 
कभी दो मिनट उसके पास कोई बैठा ना था 
आज लोगों का हुजूम पास बैठा था 
किसी ने कभी उसको कोई तोहफा दिया ना था 
आज फूल ही फूल दिए जा रहे थे 
उसके साथ कोई दो कदम कभी चला ना था 
आज काफिला बन चल रहे थे 
वह तरस गया था सबके साथ के लिए 
आज लोग उसे कंधे पर बिठा ले जा रहे थे 

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कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
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