Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veena_advani

मोहब्बत का मरहम़ लगा

 मोहब्बत का मरहम़ लगा फ़रेब दिया तूने चाहे , रूह में मेरी तू ही समाता है ये दिल तो कायल …


 मोहब्बत का मरहम़ लगा

मोहब्बत का मरहम़ लगा

फ़रेब दिया तूने चाहे , रूह में मेरी तू ही समाता है

ये दिल तो कायल था, आज भी तुझे ही चाहता है।।

जानती हूं तेरी जिंदगी में तुझे , मेरी जरुरत ही नहीं

ये दिल आज भी तुझे पाने कि ही उम्मीद लगाता है।।

जख़्म इतने दिये हैं तुमनें ,  सुनो ओ मेरे हमनवां

भूल हर ज़ख्म को , दिल तुझे गले लगाना चाहता है।।

सुन कभी तो तुमको भी मेरा ख्याल आता ही होगा

मेरे एहसास तेरे करीब होने का ही अहसास दिलाता है।।

अपनी रुह में इस कदर बसाए बैठे थे हम तुमको सनम

क्या मेरी जिंदगी की सांसों कि डोर खुदमें तू ना पाता है।।

दर्द हर जख़्म में इतना कि ये दर्द ए तड़प नहीं घटती

क्यों ना अपनी मोहब्बत का मरहम़ तू दर्द पर  लगाता है।।

टूट न पाएं देखों वीणा के सांसों के बंधन के ये तार

क्यों ना फिर  साज़ छेड़ वीणा को तू सुर ना दे जाता है।।

वीना आडवाणी तन्वी

   *दर्द ए शायरा*

     नागपुर, महाराष्ट्र


Related Posts

आसान रास्ता- जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

आसान रास्ता वक्त ज्यादा लगता है,जुनून ज्यादा लगता है,प्रतिभा ज्यादा लगती है,साल दर साल मेहनत करकेएक नया एवं बेहतर इतिहास

वो तैयार बैठी हैं अब- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

वो तैयार बैठी हैं अब लोकतंत्र में…चुनी गईं सरकारेंजनता की आवाज उठाने के लिए,निरंकुश हो,तैयार बैठी हैं अबजनता की ही

छोड़ दिए गये हैं मर जाने के लिए-जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

छोड़ दिए गये हैं मर जाने के लिए बहुत वक्त और संसाधन लग जातेकिसी देश के…इस कोरोना नामक महामारी कोपूरी

तोड़ा क्यों जाए?- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

तोड़ा क्यों जाए? गुलाब!तुम सलामत रहनाअपनी पत्तियों, टहनियों, जड़ों,परिवेश और वजूद के साथ,तुम्हारी महक और खूबसूरतीका इस्तेमाल नहीं करना है

विरोध के स्वप्न और इंसानी कायरता- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

विरोध के स्वप्न और इंसानी कायरता आज मेरे स्वप्न में..पेड़ों ने हड़ताल कीपरिंदों के आज़ादी सेआकाश में उड़ने परलगे प्रतिबंधों

मां शारदे वंदना- डॉ. इन्दु कुमारी

February 14, 2022

ओ शारदे मां ज्ञान ओ शारदे मां ज्ञान की गंगा बहा दे मांमैं हूं अज्ञानी नेह कीकृपा बरसाओ नातू ही

Leave a Comment