Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Prachi Sadana

मैं मुस्कुराना सीखी हूं| mai muskurana seekhi hun| kavita

मैं मुस्कुराना सीखी हूं| mai muskurana seekhi hun| kavita मैं मुस्कुराना सीखी हूं दर्द को छुपा कर गम को दफनाकर …


मैं मुस्कुराना सीखी हूं| mai muskurana seekhi hun| kavita

मैं मुस्कुराना सीखी हूं| mai muskurana seekhi hun| kavita
मैं मुस्कुराना सीखी हूं

दर्द को छुपा कर गम को दफनाकर चंचलता का भाव दिखाकर आखिर मैं मुस्कुराना सीखी हूं कहां से

टूट चुकी मन से थक चुकी तन से जीवन में खुशियों के पल चले गए जीवन से हर पल गम के सागर में डूबे रहते हुए भी ना जाने मुस्कुराना सीखी हूं कहां से

चारों और खुशियों की महफिल में भी जा कर उदासियों का आलम दिल में छुपाकर ना जाने मुस्कुराना सीखी हूं कहां से

खुद की परिस्थितियों पर पर्दा लगा कर मन की पीड़ा मन में दबाकर रोने वाले को हंसने का अंदाज बताकर ना जाने मुस्कुराना सीखी हूं कहां से

कालचक्र की कुचक्रों में घिरी हर हालातो से निकलकर भाग्य के हर लेख से लड़कर खुद से नहीं अपनों से हार कर ना जाने भीर भी मुस्कुराना सीखी हूं कहां से

याद कर के बचपन की भाव मन की सारी बातों को बताओ दादी की डांट दादा का लाढ जीवन में ना ठहरा खुशियों का बौछार रोते में हंसते-हंसते में रोते मुस्कुराना सीखी हूं वहां से

काफी प्रश्न खुद से पूछने के बाद उत्तर का ख्याल आया मन में जीवन में प्रैक्टिकली वक्त ने सिखाया मुस्कुराने का सारा आलम है छाया

About author 

नाम :-प्राची सदाना (पत्रकार )
पता :-रायपुर छत्तीसगढ़


Related Posts

कविता-भ्रष्टाचार को रोककर सुशासन लाना हैं

September 17, 2022

कविता-भ्रष्टाचार को रोककर सुशासन लाना हैं सरकारों को ऐसी नीतियां बनाना हैं भ्रष्टाचार को रोककर सुशासन को आखरी छोर तक

मानसिक स्वास्थ्य के सिद्धांत।

September 13, 2022

मानसिक स्वास्थ्य के सिद्धांत। pic credit – freepik.com हमेशा कुछ न कुछ नया सिखिए, स्वास्थ्य और शरीर का पूर्ण रूप

कहां खो रही है….?

September 13, 2022

नन्हीं कड़ी में…. 🌞 आज की बात 🌞 🌹 कहां खो रही है….?(कविता)🌹 Pic credit – freepik.com मेरे देश की

हिंदी हृदय गान है

September 13, 2022

हिंदी हृदय गान है Pic Credit -freepik.com आन-बान सब शान है, और हमारा गर्व। हिंदी से ही पर्व है, हिंदी

कविता-तब से आदमी भी पेंड़ होना चाहता है ..!

September 13, 2022

 कविता-तब से आदमी भी पेंड़ होना चाहता है ..!  Pic credit -freepik.com मैं उस हरकारे के बच्चों को भी उसी

शिक्षक(Teacher’s day special)

September 4, 2022

शिक्षक अज्ञानता को दूर कर हमसेज्ञान का जो पाठ पढ़ाये, वह कहलाते गुरु (शिक्षक) हमारेकरे क्या वर्णन आज, इकठ्ठा हुए

PreviousNext

Leave a Comment