Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, R.S.meena

मैं तेरा दांत तोड़ दूंगा- R.S.meena Indian

कविता -मैं तेरा दांत तोड़ दूंगा मिल जाये गर रहबर ,हर बात छोड़ दूँगा । कह दूं सोहबतों से, मैं …


कविता -मैं तेरा दांत तोड़ दूंगा

मैं तेरा दांत तोड़ दूंगा- R.S.meena Indian
मिल जाये गर रहबर ,हर बात छोड़ दूँगा ।

कह दूं सोहबतों से, मैं तेरा साथ छोड़ दूंगा ।।
अभी भी थोड़ा वक़्त बचा हैं संभल जाओ ।
वरना बच्चा भी बोलेंगा मैं तेरा दाँत तोड़ दूंगा ।।

कभी फुरसत में अपना अतीत याद करना ।
हो जाओ मुकम्मल ऐसा प्रतीत याद करना ।।
बन जाओ तुम बवंडर तो मैं हाथ जोड़ दूंगा ।
वरना बच्चा भी बोलेगा मैं तेरा दांत तोड़ दूंगा ।।

रगों में जोश तो आता हैं चंद समय की खातिर ।
सारा जगत जानता हैं तुम बहुत बड़े हो शातिर ।।
वादा करलो खुद से की बुरे जज़्बात छोड़ दूंगा ।
वरना बच्चा भी बोलेगा मै तेरा दांत तोड़ दूंगा ।।

गुज़र गया अस्तित्व बदल गया अब तेरा रूप ।
कहना बुरा है मग़र सच बोलता हैं “स्वरूप” ।।
गर सुधर जाओ तो तेरी हर बात छोड़ दूंगा ।
वरना बच्चा भी बोलेगा मैं तेरा दांत तोड़ दूंगा ।।

R.S.meena Indian
K.Renwal. Jaipur


Related Posts

zindagi ka wada by Abhilekha Ambasth Gazipur

July 23, 2021

शीर्षक-जिंदगी का वादा कहीं कम तो कहीं ज्यादा, बस यही है जिंदगी का वादा,  कहीं धूप कहीं छाया,  बस यही

shabdo ki chot kavita by samay singh jaul delhi

July 23, 2021

शब्दों की चोट शब्दों की चोट जब पड़ती है।   चित्त में चेतना की चिंगारी निकलती है।।   जैसे बसंत में भी

Gazal hum tumhare hue tum hamare hue by antima singh

July 23, 2021

शीर्षक- हम तुम्हारे हुए, तुम हमारे हुए दिल की दरिया को दिल में उतारे हुए,हम तुम्हारे हुए तुम हमारे हुए।

Anant path by madhushri maharashtra

July 23, 2021

अनंत पथ ओ पथिक अनंत पथ केछोड़ उठ चल कुछ न अपनाजो भी था तेरा नहीउद्भ्रांत जग का था सपनाअब

idhar awaze bahut hai by prem prakash uttrakhand

July 23, 2021

इधर आवाजें बहुत हैं ——- चलते-फिरतेउठते-बैठतेखाते-पीतेसोते-जागतेअंदर-बाहरऊपर-नीचेइधर-उधरशायद बसासत है इन्सान रहते होंगे। क्यों…?आवाजें नही होतीखग,परिन्दोंकीट-पतंगोपेड़-पौधोंफल-फूलोंजानवरों की।या नही होती हैंगिरते झरने, बहती

Mahesh Keshari ki kavitayen

July 23, 2021

कविताएं (1) कविता..  तहरीर में पिता..  ये कैसे लोग हैं ..??  जो एक दूधमुंही नवजात बच्ची के मौत को नाटक

Leave a Comment