Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

मेरे लेखन का ध्येय- जितेन्द्र ‘कबीर

मेरे लेखन का ध्येय मुझे पता है कि आजकल मेरा लेखनसरकार में शामिल दलों औरउनके समर्थकों को नहीं भाता हैक्योंकि …


मेरे लेखन का ध्येय

मेरे लेखन का ध्येय- जितेन्द्र 'कबीर

मुझे पता है

कि आजकल मेरा लेखन
सरकार में शामिल दलों और
उनके समर्थकों को नहीं भाता है
क्योंकि इसमें आए दिन
उनकी नाकामियों का लेखा-जोखा
उभर कर आता है,
इसके विपरीत सरकार विरोधियों को
मेरा लिखा सुहाता है
और ऐसा होना लाजमी भी है
क्योंकि इस दुनिया में दुश्मन का दुश्मन
भी दोस्त कहलाता है।
मुझे विश्वास है
कि जो लोग आज सत्ता में हैं
वो कल विपक्ष में जाएंगे तो
मेरे लेखन पर जरूर तालियां बजाएंगे
और जो लोग विपक्ष में हैं
अगर वो सत्ता में आएंगे तो
मेरे लेखन पर पक्का गुर्राएंगे,
क्योंकि इन लोगों की आस्था
देश के प्रति नहीं
सिर्फ दल विशेष के प्रति है,
उस दल से कोई भ्रष्टाचारी, व्यभिचारी,
हत्यारा भी टिकट लेकर आएगा
तो वो उसे भी वोट देकर जिताएंगे,
अपने दल के गलत निर्णयों की
करेंगे हमेशा तारीफ ही
लेकिन दूसरों की सही बातों को भी
गलत ही ठहराएंगे।
मुझे उम्मीद है
कि मेरा लेखन हमेशा बुराइयों के
प्रतिकार में खड़ा रहेगा,
सच्चाई और न्याय के पैरोकार
के तौर पर खड़ा रहेगा,
वंचितों और शोषितों के मददगार
के तौर पर खड़ा रहेगा,
डरा कर दबाई जा रही आवाजों की
पुकार के तौर पर खड़ा रहेगा
और तानाशाही के खिलाफ लोकतंत्र की
हुंकार के तौर पर खड़ा रहेगा।

जितेन्द्र ‘कबीर
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति-अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

आने वाला पल- सुधीर श्रीवास्तव

January 13, 2022

आने वाला पल आने वाला पल तो आकर ही रहेगा, जैसे जाने वाला पल भीभला कब ठहरा है ? क्योंकि

गुरु गोविंद पुकारा है – डॉ इंदु कुमारी

January 13, 2022

गुरु गोविंद पुकारा है तेग बहादुर सिंह ने अपने बेटे को बलिदान दिया झुका नहीं दुश्मन के आगेमौत को भी

व्याकुल अंतर- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

January 13, 2022

व्याकुल अंतर प्रीत निभाती रात गई बित , जोड़ जोड़ कर सपने-अपने,बंद आंखों में मिलन यामिनी ,हुई भोर तो साथ

कान्हा तू काहे करत मनमानी -सरस्वती मल्लिक

January 13, 2022

कविता : कान्हा तू काहे करत मनमानी कान्हा तू काहे करत मनमानी बार -बार समझाया तुझकोफिर भी एक न मानीनित

प्रेरणा- सुधीर श्रीवास्तव

January 13, 2022

प्रेरणा कहने सुनने में छोटा सा शब्द मगर भाव बड़ा है, किसी की अंधेरे में डूबती जिंदगी मेंउम्मीद की किरण

बता रहा है धुआँ – सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 7, 2022

शीर्षक – बता रहा है धुआँ आदमी अंदर और बाहर उड़ा रहा है धुआँ तिल -तिल फेफड़ों को सड़ा रहा

Leave a Comment