Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

मेरी काव्य धारा-डॉ हरे कृष्ण मिश्र

 मेरी काव्य धारा मेरी काव्य धारा में, डूबा प्रेम तुम्हारा है , रचना भी तुम्हारी है, प्रणय भी तुम्हारा है  …


 मेरी काव्य धारा

मेरी काव्य धारा-डॉ हरे कृष्ण मिश्र

मेरी काव्य धारा में,

डूबा प्रेम तुम्हारा है ,

रचना भी तुम्हारी है,

प्रणय भी तुम्हारा है  ।।

गीतों में शब्दों का ,

चयन भी तुम्हारा है,

साथ बैठ लिख लेते थे,

दर्द को बाटा करते थे  ।।

हंसते गाते जीवन अपने,

शब्दों में कट जाते थे ,

आज कहां हम दोनों हैं,

दर्द हमारे कितने हैं  ।।

अतीत हमारा दर्द लिए है,

वर्तमान हमारा सूना है ,

जीवन के सूनेपन को मैं,

सरगम सा सहलाया हूं  ।।

छंद लोरियां दर्द भरे हैं ,

आतुर मन गा लेता है ,

गले हमारे रूंध गए हैं, 

फिर भी गायन करते हैं  ।।

इतने सुंदर इतने प्यारे ,

मदिरा भरी हुई प्याली,

किस ने दे दी  तुझको ,

नीलम की सुंदर प्याली  ।।

नील नयन में खोया है ,

मन विहव्ल सा होकर ,

ख्वाब भरी आंखों में ,

पावन प्रणय ललक है ।।

काश हमारे साथ तू होती,

मेरा मन नहीं बोझिल होता,

मैं भी चलता धीरे-धीरे ,

मिल जाता जीवन पथ ।।

परिभाषा में बांधू कैसे,

जीवन भर का प्यार ,

छोड़ चले हर सीमा को,

तूने छोड़ दिया संसार  ।।

मिल बैठ अनुशीलन करते,

संघर्ष भरे जीवन  अपना,

बिना तुम्हारे आगे चलना ,

अब नहीं होगा आसान  ।।

परिवार हमारा बना प्यार से,

प्यार हमारा जूड़ा तुम ही से,

कहती रही सदा तुम हम से , 

प्यार कभी ना होगा कम  ।।

लिखने को  लिख लेता हूं,

गाने को मैं गा भी लेता हूं ,

पर गाते गाते रो जाता हूं ,

आंसू  रोक नहीं पाता हूं  ।।

मौलिक रचना
                डॉ हरे कृष्ण मिश्र
                बोकारो स्टील सिटी
                झारखंड ।


Related Posts

गुरुनानक जी-सुधीर श्रीवास्तव

November 22, 2021

 गुरुनानक जी कार्तिक मास में संवत पन्द्रह सौ छब्बीस को माँ तृप्ता के गर्भ से कालू मेहता के आँगन  तलवंडी,

राजनीति की जीत-जितेंद्र कबीर

November 22, 2021

 राजनीति की जीत राजनीति की जीत है यह लोकतंत्र की जीत का मत दो इसे नाम, पहले-पहल जब उठी थी

बंदर और इंसान-जितेंद्र कबीर

November 22, 2021

 बंदर और इंसान एक दिन सारे बंदर अपने आपको इंसान घोषित कर देंगे इंसानों के ऊपर  इतिहास के साथ छेड़खानी

Swapn ujle hai by siddharth gorakhpuri

November 17, 2021

स्वप्न उजले हैं. स्वप्न उजले हैं ये कह रहा है कोई। उकेरना चाहता है हकीकत कोई। हकीकत को हकीकत होने

Manzil by Indu kumari

November 17, 2021

 मंजिल भूल जाना किसी तरह से जो  राह की  रूकावट  है सजा लेना माथे पे सदा ही जो जिन्दगी की

Peeda khone ki teri by Dr. H.K. Mishra

November 17, 2021

 पीड़ा खोने की तेरी तोड़ चली हर रस्मों को तेरा पथ ज्योतिर्मय है, मेरा क्या मैं रहा अकेला, कौन सुनेगा

Leave a Comment