Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

मेरा प्यार आया है-जितेन्द्र ‘कबीर’

मेरा प्यार आया है भटका हूं तेरी तलाश में बहुतमिले हो अब तो मुझमें ठहराव आया है,करने दे थोड़ा आरामअपनी …


मेरा प्यार आया है

मेरा प्यार आया है-जितेन्द्र 'कबीर'

भटका हूं तेरी तलाश में बहुत
मिले हो अब तो मुझमें ठहराव आया है,
करने दे थोड़ा आराम
अपनी जुल्फों की छांव में
कि बड़ी मुश्किल से हसीं यह
पड़ाव आया है।
जितनी देरी से मिला है यह तोहफा
उतना ही खूबसूरत और नायाब आया है,
छूकर जरा यकीं दिलाने दे मुझे खुद को
कि है यह हकीकत
या कि फिर मुझे हसीं कोई ख्वाब आया है।
बंजर प्यासी थी मेरे मन की धरा
बुझाने उसकी प्यास
प्यार का यह सैलाब आया है,
ईश्वर आ नहीं पाया
लेकिन उसका नुमांइदा बनकर
मेरी जिंदगी में यह आफताब आया है।

जितेन्द्र ‘कबीर’
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति-अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

साहित्य राष्ट्र की महानता

July 6, 2023

भावनानी के भाव साहित्य राष्ट्र की महानता साहित्य राष्ट्र की महानता और वैभव का दर्पण होता है साहित्य को आकार

भारतीय नारी सब पर भारी- Kavita

July 6, 2023

भावनानी के भाव भारतीय नारी सब पर भारी पुरुषों से कम नहीं है आज की भारतीय नारी व्यवसाय हो या

नारी पर कविता | Naari par kavita

July 2, 2023

भावनानी के भाव  नारी पर कविता  नारी ऐसी होती है जो सभी रिश्तो को एक धागे में पिरोती हैमां बहन

मुझे कहॉं लेखन विद्या आती

July 2, 2023

मुझे कहॉं लेखन विद्या आती मुझे कहॉं सच लेखन विद्या आतीमैं तो बस खुद के लिए लिख जातीखुद को मिले

मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं

July 2, 2023

भावनानी के भाव मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं   मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं अटके काम

भारतीय संस्कार पर कविता

July 2, 2023

भावनानी के भाव भारतीय संस्कार पर कविता भारतीय संस्कार हमारे अनमोल मोती है प्रतितिदिन मातापिता के पावन चरणस्पर्श से शुरुआत

PreviousNext

Leave a Comment