Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

मेघदूत की उत्पत्ति के पीछे भी एक कथा

मेघदूत महा कवि कालिदास का परिचय देना आदित्य को दिया दिखा पथ दर्शन सा लगेगा।लेकिन मेघदूत की उत्पत्ति के पीछे …


मेघदूत

महा कवि कालिदास का परिचय देना आदित्य को दिया दिखा पथ दर्शन सा लगेगा।लेकिन मेघदूत की उत्पत्ति के पीछे भी एक कथा हैं।
    कुबेर जो धन के देवता हैं वे शिवजी के परम भक्त थे।रोजाना ब्रह्म मूरत में 108 कमलों से वे शिवजी की पूजा अर्चना करते थे।ये नियम का जीवन पर्यंत निर्वाह करने का व्रत था उनका।अब वे तो हुए ही कुबेर तो कमल चुन ने तो खुद जायेंगे नहीं तो यक्ष जो उनकी सेवा में रहता था उसे  कमल को मानसरोवर से ला कर उनको पूजा में मंदिर तक पहुंचने का कार्य दे दिया।अब ब्रह्म मुहूर्त में पूजा होने हैं तो मध्यरात्रि में फूलों को चुटने के लिए जाना पड़ता था।कुछ दिन तो यही सिल सिला चला लेकिन उसकी प्रेमिका को थोड़ा एतराज था तो वह नाराज रहने लगी।जो सही मायने में कमल होते हैं वे रात्रि में अपनी पंखुड़ियों को बंद कर देते हैं जो प्रात: खुल जाती हैं।उसने यक्ष को सलाह दी कि वह रात को ही बंद कमलों को ला के रख ले और ब्रह्म मुहूर्त में राजा कुबेर को मंदिर में जा कर दें आएं।यक्ष तो खुश हो गया कि मध्यरात्रि को उठना नहीं पड़ेगा तो वह रोज यही काम करने लगा।लेकिन एक दिन एक कमल में भंवरा जो कुछ रस ज्यादा पीने का लालची था वह पंखिरियों के बंद होने से पहले नहीं निकल पाया और कमल में बंद हो गया।सुबह जब कुबेर जी ने कमल को पकड़ा तभी कमल की पंखुड़ियां खिल गईं और इतनी देर से कमल में बंद भंवरा जुंजलाया हुआ था कुबेरजी की उंगली पर काट गया।और मधु मक्खी और भंवरे का काटने पर होती पीड़ा को वही जानता हैं जिसे कटा हो।कहते हैं न,
’जिस के पैर न पड़ी बुवाई,
वो क्या जानें पीड़ पराई’
बस हुआ भी वही दर्द से चिल्ला कर कुबेर ने यक्ष को बुलाया और गभराया हुआ यक्ष आया और दिलगिरी के साथ ही पूरी बात बता दी।कुबेरजी पीड़ा ग्रहित शब्दों में उसे शाप दे दिया की जिसकी चाह में उसने उनको पीड़ा दी हैं उसी से वह दूर हो जाएगा।और वह जंगल और पहाड़ों में फिरता भटकता रहा और अपनी प्रेमिका को याद करता रहा।अब उसे संदेश दे भी तो कैसे? उसने मेघदूत यानि बादलों को बोला कि तुम जाओ और मेरी प्रियतमा को मेरा संदेश पहुचाओं।कवि कालिदास की ये रचना पढ़ना सभी लेखकगण की पहली इच्छा रहेगी जिसमे अपनी प्रणय वेदना जो यक्ष ने बादलों के सामने वर्णित की हैं वह अति उत्तम हैं,भाषा की पराकाष्ठा हैं।

About Author

जयश्री बिरमी सेवानिवृत शिक्षिका  अहमदाबाद

जयश्री बिरमी

सेवानिवृत शिक्षिका 
अहमदाबाद

Related Posts

Bharteey paramparagat lokvidhaon ko viluptta se bachana jaruri

August 25, 2021

भारतीय परंपरागत लोकविधाओंं, लोककथाओंं को विलुप्तता से बचाना जरूरी – यह हमारी संस्कृति की वाहक – हमारी भाषा की सूक्ष्मता,

Dukh aur parishram ka mahatv

August 25, 2021

दुख और परिश्रम का मानव जीवन में महत्व – दुख बिना हृदय निर्मल नहीं, परिश्रम बिना विकास नहीं कठोर परिश्रम

Samasya ke samadhan ke bare me sochne se raste milte hai

August 25, 2021

समस्या के बारे में सोचने से परेशानी मिलती है – समाधान के बारे में सोचने से रास्ते मिलते हैं किसी

Scrap policy Lekh by jayshree birmi

August 25, 2021

स्क्रैप पॉलिसी      देश में प्रदूषण कम करने के लिए सरकार कई दिशाओं में काम कर रही हैं,जिसमे से प्रमुख

Afeem ki arthvyavastha aur asthirta se jujhta afganistan

August 25, 2021

 अफीम की अर्थव्यवस्था और अस्थिरता से जूझता अफगानिस्तान– अफगानिस्तान के लिए अंग्रेजी शब्द का “AAA” अल्ला ,आर्मी, और अमेरिका सबसे

Lekh by jayshree birmi

August 22, 2021

 लेख आज नेट पे पढ़ा कि अमेरिका के टेक्सास प्रांत के गेलवेस्टैन काउंटी के, जी. ओ. पी. काउंसील के सभ्य

Leave a Comment