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Jitendra_Kabir, poem

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ- जितेन्द्र ‘कबीर’

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ ‘तुम्हारा साथ’ मेरे लिएहै एक तरह कीमृगतृष्णा सा,दूर कहीं झिलमिलाताहुआ साबुलाता है मुझे अपने पास,तुम्हारे दुर्निवार …


मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ


‘तुम्हारा साथ’ मेरे लिए
है एक तरह की
मृगतृष्णा सा,
दूर कहीं झिलमिलाता
हुआ सा
बुलाता है मुझे अपने पास,
तुम्हारे दुर्निवार आकर्षण
के वशीभूत

हृदय में लिए मिलन का
त्रास
तय करता हुआ
लम्बी राह
भुलाकर अपनी भूख-प्यास
पहुंचने लगता हूं जब भी
कभी तुम्हारे पास,

नहीं मिलती तुम वहां,
फिर से कहीं दूर होता है
तुम्हारे होने का आभास,
जबकि
‘तुम्हारा इंतज़ार’
है मेरे हर एक बीतते
पल का मानो श्वास,
प्रेम सागर में डूब कर
तर जाने का

दिलाते हुए विश्वास,
तुम्हारी मधुर स्मृतियों की
हमेशा दिलाते हुए याद
मन में जगाए रखता है
जीते जी
तुमसे मिलने की आस।

जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति-अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र -7018558314


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