Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ- जितेन्द्र ‘कबीर’

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ ‘तुम्हारा साथ’ मेरे लिएहै एक तरह कीमृगतृष्णा सा,दूर कहीं झिलमिलाताहुआ साबुलाता है मुझे अपने पास,तुम्हारे दुर्निवार …


मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ


‘तुम्हारा साथ’ मेरे लिए
है एक तरह की
मृगतृष्णा सा,
दूर कहीं झिलमिलाता
हुआ सा
बुलाता है मुझे अपने पास,
तुम्हारे दुर्निवार आकर्षण
के वशीभूत

हृदय में लिए मिलन का
त्रास
तय करता हुआ
लम्बी राह
भुलाकर अपनी भूख-प्यास
पहुंचने लगता हूं जब भी
कभी तुम्हारे पास,

नहीं मिलती तुम वहां,
फिर से कहीं दूर होता है
तुम्हारे होने का आभास,
जबकि
‘तुम्हारा इंतज़ार’
है मेरे हर एक बीतते
पल का मानो श्वास,
प्रेम सागर में डूब कर
तर जाने का

दिलाते हुए विश्वास,
तुम्हारी मधुर स्मृतियों की
हमेशा दिलाते हुए याद
मन में जगाए रखता है
जीते जी
तुमसे मिलने की आस।

जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति-अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र -7018558314


Related Posts

आप और मधुकवि मधुर गीत

December 26, 2022

आप और मधुकवि मधुर गीत सुकृत सुमन शुभ सुरभि सयानी||मोहनि छवि मुख पर मुस्कानी|| देखे कई पुष्प उपवन में||तुम सा

नव वर्ष और मधुकवि का भारत

December 26, 2022

नव वर्ष और मधुकवि का भारत आ गया नवबर्ष फिर भी तू सो रहा||झूठे ख्वाबों ख्यालों क्यों खो रहा|| राष्ट्र

मधुकवि का भारत और राष्ट्र को समर्पित गीत

December 26, 2022

मधुकवि का भारत और राष्ट्र को समर्पित गीत अपने भारत सा दुनिया में कोई नहीं||भारतीयता जो गर तूने खोई नहीं||

ऐसे हम नववर्ष का,आओ सत्कार करें

December 26, 2022

ऐसे हम नववर्ष का,आओ सत्कार करें ऐसे हम नववर्ष का, आवो सत्कार करें।द्वेष, नफरत मन से मिटाकर, सबका उद्धार करें।।ऐसे

अधखिली यह कली | adhkhuli yah kali

December 26, 2022

अधखिली यह कली अधखिली यह कली , जो खिलती कभी ।तोड़ डाला इसे , जालिमों ने अभी ।।यह तो मिटने

वह देश हिंदुस्तान है | vah desh hindustan hai

December 26, 2022

शीर्षक – वह देश हिंदुस्तान है जहाँ मिलता है सम्मान सभी को,वह देश हिंदुस्तान है।आदर है जहाँ सभी धर्मों का,

PreviousNext

Leave a Comment