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poem, Veena_advani

मुझे भी जीने दो| mujhe bhi jeene do

अपने गुनाह को कूड़ेदान के नाम कियादुनिया ने पाल मुझे लावारिस नाम दिया।। खता तो तुमने की थी नवयुवाओं लेकिनसजा …


अपने गुनाह को कूड़ेदान के नाम किया
दुनिया ने पाल मुझे लावारिस नाम दिया।।

खता तो तुमने की थी नवयुवाओं लेकिन
सजा ताउम्र कि तुमने तो मेरे नाम किया।।

कोई नाम से बुलाता कभी तो कभी लावारिस
लावारिस शब्द सुन दर्द मिला बस जाम पिया।।

सोचता वो मॉं थी कैसे कलेजा ना फटा उसका
मॉं नाम से नफरत भर मुझमें मेरा कत्ले आम किया।।

दुनिया दो रोटी देकर मुझे अकसर दुतकारी है
पेट की भूख ने मुझे गाली सुनने को लाचार किया ‌।।

जीना चाहता हूं मैं भी लावारिस सम्मान के साथ
इस दुनिया ने सुकून शब्द ही ना मेरे नाम किया।।

लावारिस हूं फिर भी ख्वाब संजोता रहता हूं
वीणा कि कलम ने दर्द लिख सज़ा मुझे सरोबार किया।।

About author 

Veena advani

वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर , महाराष्ट्र



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