Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

मुझको भैयाजी माफ़ करना – गल्ती मारे से हो गई

मुझको भैयाजी माफ़ करना – गल्ती मारे से हो गई  गल्ती हो जाने पर क्षमा मांगना हर समस्या का तर्कसंगत …


मुझको भैयाजी माफ़ करना – गल्ती मारे से हो गई 

एड किशन भावनानी

गल्ती हो जाने पर क्षमा मांगना हर समस्या का तर्कसंगत समाधान है 

हमसे वाकई कोई गल्ती हो गई है तो गंभीरता से क्षमा मांगना हमारा बड़प्पन होगा और अपनी खामियों के बावजूद सम्मान, भरोसा हासिल होगा – एड किशन भावनानी 

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारतीय सभ्यता, संस्कृति, मूल्यों मर्यादा और आध्यात्मिकता की सजगता दुनिया में कहीं नहीं है हमारी सभ्यता के अनेक मोतियों में से एक क्षमां मांगना है बड़े बुजुर्गों का कहना है जो क्षमा करता है पुरानी बातों को भूल जाता है वही सबसे बड़ा दानी है क्योंकि क्षमादान जैसा कोई दान नहीं यहवैचारिक शक्ति है भारतीय सभ्यता की!! 

साथियों बात अगर हम हमारे आज के विषय वस्तु क्षमा मांगने की करें तो, क्षमा करने के सुनहरे नियम के साथ-साथ एक पहलू यह भी है कि हमसे अगर गलती हो जाए तो हमें शांत स्वभाव से अपनी गलती को स्वीकार कर लेना चाहिए और माफी मांगनी चहिए, क्योंकि हमेशा याद रखें कि माफी मांगने से हमेशा रिश्ते मजबूत ही होंगे, दो लोगों के बीच कभी बैर नहीं होगा। माफ करने या माफी मांगने की आदत से यह मालूम पड़ता है कि व्यक्ति तुच्छ भावों के मुकाबले में रिश्ते को ज्यादा अहमियत देता है। 

साथियों बात अगर हम मानव जीव में क्षमा भाव की करें तो, क्षमा भाव जिसके भीतर विकसित हो जाता है, वह व्यक्ति समाज में आदरणीय माना जाता है। किसी को किसी की भूल के लिए क्षमा करना और आत्मग्लानि से मुक्ति दिलाना एक बहुत बड़ा परोपकार है। कितना आसान है किसी से अपनी गलती की माफी मांगना और उससे भी ज्यादा आनंद तब मिलता है, जब वह व्यक्ति हमें माफ कर देता है। क्षमा का शस्त्र जिसके पास है, उसका दुष्ट मानव कुछ नहीं बिगाड़ सकते। जिस तरह बिना तिनकों की पृथ्वी पर गिर कर अग्नि खुद ही शांत हो जाती है।

साथियों बात अगर हम क्षमा मांगने की परिस्थिति की करें तो, यदि हमसे वाकई गलती हो गई है तो गंभीरता से क्षमा मांगें। कोई स्पष्टीकरण दें, हमारी गलती से वह विचलित है और हमारे कारणों को समझने की स्थिति में नहीं है। उसे पहले शांत कर सामान्य स्थिति में लाएं। दिल से मांगी गई माफी से स्थिति सामान्य हो जाएगी। यह हमारा बड़प्पन भी होगा कि जो व्यक्ति हमारे कारण दुखी हुआ है और हम अपनी गलती स्वीकार कर उसे सामान्य होने में मदद कर रहे हैं। फिर हुए नुकसान या असुविधा की पूर्ति के लिए तत्काल प्रयास करें। व्यर्थ की दलीलों में समय बर्बाद करने की बजाय तत्काल कदम उठाएं। इस तरह हम अपनी खामियों के बावजूद सम्मान भरोसा हासिल करेंगे। अन्यथा भावनाओं की गलत अभिव्यक्ति से आप हमेशा तनाव में रहेंगे, जो आपको समाधान से दूर और दूर ले जाएगा। 

साथियों बात अगर हम क्षमा देने की करें तो, कमजोर व्यक्ति कभी क्षमा नहीं कर सकता, क्षमा करना तो शक्तिशाली व्यक्ति का गुण है। जो पहले क्षमा मांगता है वह सबसे बहादुर है और जो सबसे पहले क्षमा करता है वह सबसे शक्तिशाली है। शास्त्रों में कहा गया है कि क्षमा वीरों का आभूषण है। बाणभट्ट के हर्षचरित में उल्लेख किया गया है कि क्षमा सभी तपस्याओं का मूल है। महाभारत में कहा गया है कि क्षमा असमर्थ मनुष्यों का गुण और समर्थ मनुष्यों का आभूषण है।’ श्री गुरु ग्रंथ साहिब का वचन है- क्षमाशील को रोग नहीं सताता और न ही यमराज डराता है। 

साथियों बात अगर हम क्षमा में भावनात्मक मिश्रण से हानि की करें तो खासकर पारिवारिक झगड़ों में हम देखते हैं कि, पति का पत्नी से झगड़ा हो गया है। उनके बीच कोई समस्या हो सकती है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है। चूंकि पत्नी का मूड खराब है तो वह बेटे पर गुस्सा उतारेगी। बेटे पर मां मामूली-सी बात पर चिल्लाई तो वह अपने साथियों से लड़ पड़ा और हम जितनी कल्पना कर सकें उतना इस कहानी को विस्तार दे सकते हैं। भावनाएं यदि समस्या के स्रोत की दिशा में हो तो भी यह उसे सुलझाने की बजाय बड़ा बना देती हैं। यहीं पर बड़ी समस्या है, क्योंकि कोई माफी मांगे इसकी बजाय भावनात्मक विस्फोट के कारण आखिर में हमें ही माफी मांगनी पड़ सकती है। 

साथियों बात अगर हम माफी मांगने में अफसोस और ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी़ के तड़के की करें तो,मुझे अफ़सोस है, इन तीन छोटे शब्दों के बिना माफी वास्तव में माफी नहीं है। उनका उपयोग करने से हम यह प्रदर्शित कर सकते हैं कि हम वास्तव में उस समस्या को उत्पन्न करने के लिए पछताते हैं जिसने शिकायत को प्रेरित किया। इन शब्दों के साथ माफी माँगने से हमको यह दिखाने में मदद मिलती है कि हम अतीत में जो कुछ हुआ है उसकी ज़िम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं। हम सुनिश्चित करेंगे कि ऐसा दोबारा न हो, यह समझाते हुए कि जो हुआ अब आगे हमेशा एक अच्छा विचार होगा, भविष्य में गड़बड़ी से मुक्त रखने के लिए हम जो कुछ भी बदलने की योजना बना रहे हैं उसे रेखांकित करके उस सफलता पर निर्माण करना सबसे अच्छा है।

साथियों बात अगर हम माफी मांगने की व्यवहारिकता की करें तो, यदि हम गलत हैं, आंशिक रूप से भी, किसी की मांग करने से पहले क्षमा मांगना बेहतर है। क्षमायाचना उन समस्याओं को हल करने में मदद कर सकती है जिन्हें हल करना सामान्य शब्दों के लिए बहुत कठिन है। क्षमा की वांछनीयता इसमें शामिल लोगों की संस्कृति पर निर्भर करती है। शर्म की संस्कृति में , एक उच्च स्थिति वाले व्यक्ति से जबरन माफी मांगना एक बहुत ही मूल्यवान चीज के रूप में देखा जाता है, क्योंकि माफी मांगने वाले व्यक्ति के सामाजिक अपमान को एक महत्वपूर्ण कार्रवाई के रूप में देखा जाता है।

शिष्टाचार दूसरों से अपेक्षा करने का मानक नहीं है, यह एक ऐसा मानक है जिसका आप स्वयं पालन करते हैं। यह कहना कभी आसान नहीं होता, मुझे क्षमा करें। लेकिन कभी-कभी, गलती के लिए माफी मांगना ही आपकी प्रतिष्ठा की रक्षा करने का एकमात्र तरीका है।

क्षमा दान महादान है 

क्षमा के बराबर कोई दान नहीं है 

गलती करना मानवीय विकार है 

क्षमा करना ईश्वरय गुण हैं

क्षमा खुशनसीब है 

अहंकार बदनसीब हैं।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि मुझको भैयाजी माफ करना गलती मारे से हो गई। गलती हो जाने पर क्षमा मांगना हर समस्या का तर्कसंगत समाधान है। यदि हमसे वाकई कोई गलती हो गई है तो गंभीरता से क्षमा मांगना हमारा बड़प्पन होगा और हमारी खामियों के बावजूद सम्मान, भरोसा हासिल होगा। 

संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनामुझको भैयाजी माफ़ करना – गल्ती मारे से हो गई 

गल्ती हो जाने पर क्षमा मांगना हर समस्या का तर्कसंगत समाधान है 

हमसे वाकई कोई गल्ती हो गई है तो गंभीरता से क्षमा मांगना हमारा बड़प्पन होगा और अपनी खामियों के बावजूद सम्मान, भरोसा हासिल होगा – एड किशन भावनानी 

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारतीय सभ्यता, संस्कृति, मूल्यों मर्यादा और आध्यात्मिकता की सजगता दुनिया में कहीं नहीं है हमारी सभ्यता के अनेक मोतियों में से एक क्षमां मांगना है बड़े बुजुर्गों का कहना है जो क्षमा करता है पुरानी बातों को भूल जाता है वही सबसे बड़ा दानी है क्योंकि क्षमादान जैसा कोई दान नहीं यहवैचारिक शक्ति है भारतीय सभ्यता की!! 

साथियों बात अगर हम हमारे आज के विषय वस्तु क्षमा मांगने की करें तो, क्षमा करने के सुनहरे नियम के साथ-साथ एक पहलू यह भी है कि हमसे अगर गलती हो जाए तो हमें शांत स्वभाव से अपनी गलती को स्वीकार कर लेना चाहिए और माफी मांगनी चहिए, क्योंकि हमेशा याद रखें कि माफी मांगने से हमेशा रिश्ते मजबूत ही होंगे, दो लोगों के बीच कभी बैर नहीं होगा। माफ करने या माफी मांगने की आदत से यह मालूम पड़ता है कि व्यक्ति तुच्छ भावों के मुकाबले में रिश्ते को ज्यादा अहमियत देता है। 

साथियों बात अगर हम मानव जीव में क्षमा भाव की करें तो, क्षमा भाव जिसके भीतर विकसित हो जाता है, वह व्यक्ति समाज में आदरणीय माना जाता है। किसी को किसी की भूल के लिए क्षमा करना और आत्मग्लानि से मुक्ति दिलाना एक बहुत बड़ा परोपकार है। कितना आसान है किसी से अपनी गलती की माफी मांगना और उससे भी ज्यादा आनंद तब मिलता है, जब वह व्यक्ति हमें माफ कर देता है। क्षमा का शस्त्र जिसके पास है, उसका दुष्ट मानव कुछ नहीं बिगाड़ सकते। जिस तरह बिना तिनकों की पृथ्वी पर गिर कर अग्नि खुद ही शांत हो जाती है।

साथियों बात अगर हम क्षमा मांगने की परिस्थिति की करें तो, यदि हमसे वाकई गलती हो गई है तो गंभीरता से क्षमा मांगें। कोई स्पष्टीकरण दें, हमारी गलती से वह विचलित है और हमारे कारणों को समझने की स्थिति में नहीं है। उसे पहले शांत कर सामान्य स्थिति में लाएं। दिल से मांगी गई माफी से स्थिति सामान्य हो जाएगी। यह हमारा बड़प्पन भी होगा कि जो व्यक्ति हमारे कारण दुखी हुआ है और हम अपनी गलती स्वीकार कर उसे सामान्य होने में मदद कर रहे हैं। फिर हुए नुकसान या असुविधा की पूर्ति के लिए तत्काल प्रयास करें। व्यर्थ की दलीलों में समय बर्बाद करने की बजाय तत्काल कदम उठाएं। इस तरह हम अपनी खामियों के बावजूद सम्मान भरोसा हासिल करेंगे। अन्यथा भावनाओं की गलत अभिव्यक्ति से आप हमेशा तनाव में रहेंगे, जो आपको समाधान से दूर और दूर ले जाएगा। 

साथियों बात अगर हम क्षमा देने की करें तो, कमजोर व्यक्ति कभी क्षमा नहीं कर सकता, क्षमा करना तो शक्तिशाली व्यक्ति का गुण है। जो पहले क्षमा मांगता है वह सबसे बहादुर है और जो सबसे पहले क्षमा करता है वह सबसे शक्तिशाली है। शास्त्रों में कहा गया है कि क्षमा वीरों का आभूषण है। बाणभट्ट के हर्षचरित में उल्लेख किया गया है कि क्षमा सभी तपस्याओं का मूल है। महाभारत में कहा गया है कि क्षमा असमर्थ मनुष्यों का गुण और समर्थ मनुष्यों का आभूषण है।’ श्री गुरु ग्रंथ साहिब का वचन है- क्षमाशील को रोग नहीं सताता और न ही यमराज डराता है। 

साथियों बात अगर हम क्षमा में भावनात्मक मिश्रण से हानि की करें तो खासकर पारिवारिक झगड़ों में हम देखते हैं कि, पति का पत्नी से झगड़ा हो गया है। उनके बीच कोई समस्या हो सकती है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है। चूंकि पत्नी का मूड खराब है तो वह बेटे पर गुस्सा उतारेगी। बेटे पर मां मामूली-सी बात पर चिल्लाई तो वह अपने साथियों से लड़ पड़ा और हम जितनी कल्पना कर सकें उतना इस कहानी को विस्तार दे सकते हैं। भावनाएं यदि समस्या के स्रोत की दिशा में हो तो भी यह उसे सुलझाने की बजाय बड़ा बना देती हैं। यहीं पर बड़ी समस्या है, क्योंकि कोई माफी मांगे इसकी बजाय भावनात्मक विस्फोट के कारण आखिर में हमें ही माफी मांगनी पड़ सकती है। 

साथियों बात अगर हम माफी मांगने में अफसोस और ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी़ के तड़के की करें तो,मुझे अफ़सोस है, इन तीन छोटे शब्दों के बिना माफी वास्तव में माफी नहीं है। उनका उपयोग करने से हम यह प्रदर्शित कर सकते हैं कि हम वास्तव में उस समस्या को उत्पन्न करने के लिए पछताते हैं जिसने शिकायत को प्रेरित किया। इन शब्दों के साथ माफी माँगने से हमको यह दिखाने में मदद मिलती है कि हम अतीत में जो कुछ हुआ है उसकी ज़िम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं। हम सुनिश्चित करेंगे कि ऐसा दोबारा न हो, यह समझाते हुए कि जो हुआ अब आगे हमेशा एक अच्छा विचार होगा, भविष्य में गड़बड़ी से मुक्त रखने के लिए हम जो कुछ भी बदलने की योजना बना रहे हैं उसे रेखांकित करके उस सफलता पर निर्माण करना सबसे अच्छा है।

साथियों बात अगर हम माफी मांगने की व्यवहारिकता की करें तो, यदि हम गलत हैं, आंशिक रूप से भी, किसी की मांग करने से पहले क्षमा मांगना बेहतर है। क्षमायाचना उन समस्याओं को हल करने में मदद कर सकती है जिन्हें हल करना सामान्य शब्दों के लिए बहुत कठिन है। क्षमा की वांछनीयता इसमें शामिल लोगों की संस्कृति पर निर्भर करती है। शर्म की संस्कृति में , एक उच्च स्थिति वाले व्यक्ति से जबरन माफी मांगना एक बहुत ही मूल्यवान चीज के रूप में देखा जाता है, क्योंकि माफी मांगने वाले व्यक्ति के सामाजिक अपमान को एक महत्वपूर्ण कार्रवाई के रूप में देखा जाता है।

शिष्टाचार दूसरों से अपेक्षा करने का मानक नहीं है, यह एक ऐसा मानक है जिसका आप स्वयं पालन करते हैं। यह कहना कभी आसान नहीं होता, मुझे क्षमा करें। लेकिन कभी-कभी, गलती के लिए माफी मांगना ही आपकी प्रतिष्ठा की रक्षा करने का एकमात्र तरीका है।

क्षमा दान महादान है 

क्षमा के बराबर कोई दान नहीं है 

गलती करना मानवीय विकार है 

क्षमा करना ईश्वरय गुण हैं

क्षमा खुशनसीब है 

अहंकार बदनसीब हैं।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि मुझको भैयाजी माफ करना गलती मारे से हो गई। गलती हो जाने पर क्षमा मांगना हर समस्या का तर्कसंगत समाधान है। यदि हमसे वाकई कोई गलती हो गई है तो गंभीरता से क्षमा मांगना हमारा बड़प्पन होगा और हमारी खामियों के बावजूद सम्मान, भरोसा हासिल होगा। 

संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्रनी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

प्रतिकूल परिस्थितियों में भी लेखन पद्धति

July 12, 2023

प्रतिकूल परिस्थितियों में भी लेखन पद्धति यदि मैं आज किसी के पसंद अनुसार चलती, या सरल भाषा मे अगर ये

आखिर क्यों नदियां बनती हैं खलनायिकाएं?

July 12, 2023

आखिर क्यों नदियां बनती हैं खलनायिकाएं? हाल के वर्षों में नदियों के पानी से डूबने वाले क्षेत्रों में शहरी बस्तियां

पानी का मूल्य और मानव | pani ke mulya aur manav par kavita

July 12, 2023

भावनानी के भाव पानी का मूल्य और मानव को समझना है पानी बचाने की ज़वाबदेही निभाना है पानी का मूल्य

अब जीएसटी चोरी की तो ईडी का डंडा चलेगा

July 12, 2023

अब जीएसटी चोरी की तो ईडी का डंडा चलेगा  विपक्ष ने टैक्स आतंकवाद की संज्ञा दी जीएसटी काउंसिल की 50

सही अवसर की प्रतीक्षा करने की अपेक्षा वर्तमान अवसर का उपयोग करें

July 12, 2023

सही अवसर की प्रतीक्षा करने की अपेक्षा वर्तमान अवसर का उपयोग करें बेकार बैठने से बेहतर है कि आपके पास

किताबी शिक्षा बनाम व्यवहारिक शिक्षा

July 12, 2023

किताबी शिक्षा बनाम व्यवहारिक शिक्षा डिग्रीयां तो पढ़ाई के खर्चे की रसीदें है – ज्ञान तो वही है जो किरदार

PreviousNext

Leave a Comment