Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

मीरा भटक रही- डॉ इंदु कुमारी

मीरा भटक रही हे नाथ परवर दिगार करवाओ अपनी दीदारभक्तों की सुनो पुकारमीरा भटक रही संसार । मायाजाल क्यों बिछायासब …


मीरा भटक रही

मीरा भटक रही- डॉ इंदु कुमारी
हे नाथ परवर दिगार

करवाओ अपनी दीदार
भक्तों की सुनो पुकार
मीरा भटक रही संसार ।

मायाजाल क्यों बिछाया
सब जीवों को भरमाया
तीन वृतियों में उलझाया
अजब रास तूने रचाया

ठोकर दर -दर खा रही
ठौह तेरी न पा रही हैँ
गीत विरहनी गा रही
इक दीवानी बुला रही ।

अंधकार में पड़े हैं जीव
कहाँ छुपे हो मेरे पीव
कहलाते हो दरिया दिल
क्यों सोये हो गाफिल।

सुनो भक्तों की पुकार
सुनें ये ह्रदय की गुहार
स्नेह की है वो हकदार
मीरा भटक रही संसार ।

डॉ. इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार


Related Posts

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर,(14 अप्रैल ) विशेष

April 27, 2022

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर,(14 अप्रैल ) विशेष एक महान नायक! समानता का अधिकार दिलाया,ज्ञान का प्रकाश चमकाया,किया संघर्ष मानवता के अधिकार

स्वयं को पहचाने!

April 27, 2022

स्वयं को पहचाने! चलो आज स्वयं को पहचाने,अपनी कमजोरियों को जाने,जग की आलोचना बहुत की,अब खुद को भी दे, थोड़े

जीवन में द्वंद का समापन!

April 27, 2022

जीवन में द्वंद का समापन! कभी पाऊं खुद को अनजान,तो कभी महान,कभी अज्ञानी, तो कभी ज्ञानी,मुझ में हे अच्छाई या

मोहब्बत का मरहम़ लगा

April 27, 2022

 मोहब्बत का मरहम़ लगा फ़रेब दिया तूने चाहे , रूह में मेरी तू ही समाता है ये दिल तो कायल

जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा

April 27, 2022

जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा दुनिया का दस्तूर हे ये जो जैसा करेगा वैसा भरेगाआज हसे दुनिया चाहे कल

वीणा के सुर खामोश हो रहे

April 27, 2022

 वीणा के सुर खामोश हो रहे मेरी तमन्नाओं के कातिल बता तूने हमें वफा क्यों न दी।। कभी मांगा न

PreviousNext

Leave a Comment