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मीरा भटक रही- डॉ इंदु कुमारी

मीरा भटक रही हे नाथ परवर दिगार करवाओ अपनी दीदारभक्तों की सुनो पुकारमीरा भटक रही संसार । मायाजाल क्यों बिछायासब …


मीरा भटक रही

मीरा भटक रही- डॉ इंदु कुमारी
हे नाथ परवर दिगार

करवाओ अपनी दीदार
भक्तों की सुनो पुकार
मीरा भटक रही संसार ।

मायाजाल क्यों बिछाया
सब जीवों को भरमाया
तीन वृतियों में उलझाया
अजब रास तूने रचाया

ठोकर दर -दर खा रही
ठौह तेरी न पा रही हैँ
गीत विरहनी गा रही
इक दीवानी बुला रही ।

अंधकार में पड़े हैं जीव
कहाँ छुपे हो मेरे पीव
कहलाते हो दरिया दिल
क्यों सोये हो गाफिल।

सुनो भक्तों की पुकार
सुनें ये ह्रदय की गुहार
स्नेह की है वो हकदार
मीरा भटक रही संसार ।

डॉ. इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार


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