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मानसून सत्र 20 जुलाई से 11 अगस्त पीडीपीबी विधेयक 2023 पास करने की उम्मीद

जनता जनार्दन की उम्मीद – मानसून सत्र 20 जुलाई से 11 अगस्त पीडीपीबी विधेयक 2023 पास करने की उम्मीद पर्सनल …


जनता जनार्दन की उम्मीद – मानसून सत्र 20 जुलाई से 11 अगस्त पीडीपीबी विधेयक 2023 पास करने की उम्मीद

मानसून सत्र 20 जुलाई से 11 अगस्त पीडीपीबी विधेयक 2023 पास करने की उम्मीद

पर्सनल डाटा प्रोटक्शन बिल पीडीपीबी 2023 को कैबिनेट की मंजूरी – मानसून सत्र 2023 में पेश होने की संभावना

वर्तमान प्रौद्योगिकी विस्तारित युग में डीपीडीपी विधेयक 2023 को कानून में परिवर्तित करना समय की मांग – एडवोकेट किशन भावनानी गोंदिया

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर प्रौद्योगिकी के विस्तारित युग में डिजिटल तंत्र का तेजी से विस्तार हो गया है जिसमें करीब करीब पूरी मानवीय स्मरण शक्ति से कई गुना अधिक संरक्षण तंत्र की व्यवस्था की है, कई एप्स पर्सनल डाटा जानकारियों सहित आम मनुष्य के जीवन कीपूरीमहत्वपूर्ण जानकारियां स्टोरेज रहती है, जिसे अब महत्वपूर्ण सुरक्षा और जवाबदेही प्रोटेक्शन की जरूरत है, जिसके लिए देश में कोई कठोर कानून नहीं है हालांकि इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा के कुछ कानून नियमावली है जिसमें पीडीपीबी विधेयक2023 जैसी गहराई व विस्तारित नियमावली नहीं है इसलिए मानसून सत्र में पीडीपीबी विधेयक 2023 को पास करना समय की मांग है। हालांकि इस विधेयक को 2019 में भी सरकार ने पेश किया था फिर 2022 में भी पेश किया था जो 3 अगस्त 2022 को जेपीसी से प्राप्त प्रस्तावित 81 संशोधनों और 12 सिफारिशों के चलते सप्लीमेंट्री बिजनेस लिस्ट में वापस लिया गया था। अब फिर मानसून सत्र 2023 में पेश करने की संभावना है इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, वर्तमान प्रौद्योगिकी विस्तार युद्ध में पीडीटीबी विधेयक 2023 को कानून में परिवर्तन करना समय की मांग है।
साथियों बात अगर हम पीडीपीबी 2023 की करें तो केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को डेटा प्रोटेक्शन से जुड़े मसौदा विधेयक को मंजूरी दे दी है। विधेयक को संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, बिल के दायरे मेंं सभी व्यक्तिगत डेटा को लाया जाएगा। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों डेटा इस बिल के दायरे में आएंगे। इसके अलावा डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड के गठन की सिफारिश की गई है, ताकि इसे संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किया जा सके। विधेयक में नियमों के उल्लंघन की प्रत्येक घटना के लिए संस्थाओं पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है। इसे आगामी सत्र में संसद में पेश किया जाएगा।’ संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 11 अगस्त तक चलेगा। प्रस्तावित कानून के तहत सरकारी इकाइयों को भी नहीं मिलेगी पूर्ण छूट सूत्र के अनुसार विधेयक में पिछले मसौदे के लगभग सभी प्रावधान शामिल हैं जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकीमंत्रालय की ओर से परामर्श के लिए जारी किए गए थे। सूत्र ने कहा, प्रस्तावित कानून के तहत सरकारी इकाइयों को पूर्ण छूट नहीं दी गई है। विवादों के मामले में डेटा संरक्षण बोर्ड फैसला करेगा। नागरिकों को सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर मुआवजे का दावा करने का अधिकार होगा। बहुत सी चीजें हैं जो धीरे-धीरे विकसित होंगी। सूत्र ने कहा कि कानून लागू होने के बाद व्यक्तियों को अपने डेटा संग्रह, भंडारण और प्रसंस्करण के बारे में विवरण मांगने का अधिकार होगा। पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल 2023 का ड्राफ्ट कैबिनेट से मंजूर:लोगों को अपने डेटा कलेक्शन स्टोरेज और प्रोसेसिंग की डिटेल मांगने का अधिकार मिलेगा। भारत में ऐसा कोई कानून फिलहाल नहीं है। मोबाइल और इंटरनेट के चलन के बाद से प्राइवेसी की सुरक्षा की जरूरत थी। कई देशों में लोगों के डेटा प्रोटेक्शन को लेकर सख्त कानून तैयार किए जा चुके हैं।पिछले साल दिसंबर में केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि सरकार संसद के मानसून सत्र में डेटा प्रोटेक्शन बिल और दूरसंचार बिल पारित कर सकती है। बता दें सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर चिंता जाहिर की थी। इस दौरान अप्रैल 2023 में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि एक नया डेटा संरक्षण विधेयक तैयार है और जुलाई में संसद के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। फिलहाल सख्त कानून न होने के वजह से डेटा कलेक्ट करने वाली कंपनियां इसका कई दफा फायदा उठाती हैं। बैंक, क्रेडिट कार्ड और इंश्योरेंश से जुड़ी जानकारियां के आए दिनों लीक हो जाने की खबरें आती रहती हैं। ऐसे में लोग अपनी डेटा की प्राइवेसी को लेकर डाउट में रहते हैं। बता दें, सरकार ने पिछले साल नवंबर में सार्वजनिक परामर्श के लिए मसौदा प्रकाशित किया था। विधयेक उसी का संस्करण है। मंत्रालय को 21,606 सुझाव प्राप्त हुए, लगभग 100 संगठनों से परामर्श किया गया।
साथियों बात अगर हम भारतीय संसद और लोकतांत्रिक व्यवस्था, विधेयक पारित करने की प्रोसेस की करें त भारत विश्व में सबसे बड़ा लोकतंत्र जनसांख्यिकीय तंत्र देश, सर्वधर्म समभाव की भावना, धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक, सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास का जुनून और राष्ट्रभक्ति के जज्बे के साथ हम आज़ादी का 75वां अमृत जयंतीमहोत्सव मना रहे हैं। इस खूबसूरती का सारा विश्व कायल है जिसे देखने हजारों सैलानी भारत आते हैं। यहां की लोकतांत्रिक व्यवस्था है ही ऐसी है कि कोई भी कानून बनाने के लिए संसद के दोनों सदनों में पास कराना, फिर राष्ट्रपति के साइन होने के बाद ही कानून बनता है। यदि संसद में कानून की धाराओं को लेकर गतिरोध उत्पन्न होता है तो ज्वाइंट पार्लियामेंट्री क मेंटी (जेपीसी) में यह विधेयक जाता है और उसकी सिफारिशों और संशोधनों के अनुसार बिल में परिवर्तन कर फिर पेश कर प्रक्रिया अनुसार कानून बनाया जाता है। इसलिए कोई भी कानून या उसमें संशोधन बनाना आसान नहीं होता अर्थात लोहे के चने चबाने पड़ते हैं जो हमें दिनांक 3 अगस्त 2022 को देखने को मिला कि केंद्र सरकार ने पर्सनल डेटा प्रोटक्शन विधेयक 2021 को जेपीसी के प्रस्तावित 81 संशोधनों और 12 सिफारिशों के चलते सप्लीमेंट्री बिजनेस लिस्ट में वापस लिए जाने के लिए पीडीपी बिल का भी नाम था।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उनका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि जनता जनार्दन की उम्मीद – मानसून सत्र 20 जुलाई से 11 अगस्त पीडीपीबी विधेयक 2023 पास करने की उम्मीद।पर्सनल डाटा प्रोटक्शन बिल पीडीपीबी 2023 को कैबिनेट की मंजूरी – मानसून सत्र 2023 में पेश होने की संभावना।वर्तमान प्रौद्योगिकी विस्तारित युग में डीपीडीपी विधेयक 2023 को कानून में परिवर्तित करना समय की मांग।

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कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट 
किशन सनमुख़दास भावनानी 
गोंदिया महाराष्ट्र 


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