Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veerendra Jain

मातृदिवस विनयांजलि-मॉं मेरा जीवन आधार

मातृदिवस विनयांजलि-मॉं मेरा जीवन आधार मातृदिवस विनयांजलि तेरा नाम जुबां पे आते ही मेरे दर्द सभी थम जाते हैं ,माँ …


मातृदिवस विनयांजलि-मॉं मेरा जीवन आधार

मातृदिवस विनयांजलि-मॉं मेरा जीवन आधार
मातृदिवस विनयांजलि

तेरा नाम जुबां पे आते ही मेरे दर्द सभी थम जाते हैं ,
माँ ,तेरे आशीषों से बिगड़े काम सभी बन जाते हैं |

सिर पर हाथ फेर के मेरे दुख सारे हर लेती हो,
धूप की तपन से बचाने मुझको हाथों से छांव कर देती हो !!

मेरे हाथों को थाम मेरे जीवन को आधार देती हो,
मेरे चारों ओर तुम बुन अपना संसार लेती हो !!

मॉं के ह्रदय की गहराई सागर से भी अधिक होती है,
मेरी सारी कटु बातों को मुस्कुराकर सहन कर लेती है !!

तुम चाबी खुशियों की, हाथों में जादू की छड़ी रखती हो,
मेरे कहने से पहले मेरे मन की सारी ख्वाहिशें पूरी करती हो !!

कैसे होंगे उऋण मैया आपके इन उपकारों से, पूछा ?
तो बस “स्वस्थ और सुखी रहो” यही तरीका बताती हो !!

ऐ माँ तुम्हारे रूप में हम भगवान के दर्शन करते हैं,
अर्घ उसे देते हैं हम जीवन तुझे अर्पण करते हैं |

मातृदिवस पर बस यही करते हैं ईश्वर से प्रार्थना ,
रहो सदा आप संग हमारे जब तक हैं धरती आसमां ||

About author 

Veerendra Jain, Nagpur
Veerendra Jain, Nagpur
Veerendra Jain, Nagpur
Instagram id : v_jain13

Related Posts

जलियांवाला बाग-

May 9, 2022

 जलियांवाला बाग बैशाखी का पावन दिन तारीख तेरह अप्रैल उन्नीस सौ उन्नीस एक सभा हो रही थी रौलेट एक्ट का

क्यों एक ही दिन मां के लिए

May 8, 2022

क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास

May 8, 2022

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास  मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

May 7, 2022

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

बीते किस्से

May 7, 2022

बीते किस्से अपनी जिंदगी के कुछ नायाब किस्से मैं सुनाती हूंलोग कहते मुझे पागल , मैं तो कलम कि दीवानी

PreviousNext

Leave a Comment