Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Laxmi Dixit, poem

मां है घर आई

मां है घर आई मां है घर आई चहुं दिग खुशियां छाईं झूम उठा है कण-कण माटी का हर चेहरे …


मां है घर आई

मां है घर आई
चहुं दिग खुशियां छाईं
झूम उठा है कण-कण माटी का
हर चेहरे पर रौनक आई।

नौ दिन खूब मचेगी धूम
मां की कृपा से ना रहेगा कोई महरूम
नित नए रूप में देगी दर्शन
हम भक्ति करेंगे झूम।

चौकी सुंदर सजाएंगे
मां को उस पर बिठाएंगे
घट करेंगे स्थापन
पीले शेर को बुलायेंगे।

ध्वजा नारियल चढ़ाएंगे
सुंदर पुष्प की माला पहनाएंगे
कुमकुम चंदन से करेंगे तिलक
लाल-लाल चोला चढ़ाएंगे।

रोज भोग करेंगे मां को अर्पण
आंखें होंगी मां का दर्पण
रोज गाएंगे आरती
मन को करेंगे मां को समर्पण।

© लक्ष्मी दीक्षित

About author 

Laxmi Dixit
© लक्ष्मी दीक्षित

 लक्ष्मी दीक्षित
ग्वालियर, मध्यप्रदेश
लेखिका, आध्यात्मिक गाइड


Related Posts

भांग के साइड इफेक्ट्स

March 9, 2023

भांग के साइड इफेक्ट्स आंखें बंद करता हूं तो अंधेरा डराता है,आंखें खुली रखता हूं तो उजाला सताता है,मुझे नींद

कविता- हौंसला तुम्हारा…

March 7, 2023

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात हौंसला तुम्हारा…(कविता) हे नारी, हो पाक-पवित्र इतनी तुम,समाज ने टटोला हमेशा तुम्हें।पग-पग पर मज़ाक

मुस्कुराना सीख रही

March 6, 2023

मुस्कुराना सीख रही मुस्कुराना सीख रही हूँ तुम्हारे बिना जीना सीख रही हूँहाँ आज फिर से मुस्कुराना सीख रही हूँजो

मेहनत ज़रूर करो पर सब योग है

March 6, 2023

भावनानी के भाव मेहनत ज़रूर करो पर सब योग है किसी का ईश्वर अल्लाह पर अपार विश्वास है कोई नास्तिक

आओ ख़ुशी से जीने की आस कायम रखें

March 6, 2023

 भावनानी के भाव आओ ख़ुशी से जीने की आस कायम रखें आओ खुशी से जीने की आस कायम रखें हम 

वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है

March 6, 2023

भावनानी के भाव वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है रक्षा क्षेत्र में समझौतों के झंडे गाड़ रहे

PreviousNext

Leave a Comment