Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

महँगाई – डॉ. इन्दु कुमारी

महँगाई पर्याप्त नहीं है कमाई कमर तोड़ दी महँगाईजनता कर रही है त्राहिसुन लो सुनो रे मेरे भाई । चलें …


महँगाई

महँगाई - डॉ. इन्दु कुमारी
पर्याप्त नहीं है कमाई

कमर तोड़ दी महँगाई
जनता कर रही है त्राहि
सुन लो सुनो रे मेरे भाई ।

चलें साग -सब्जी की मंडी
दिलरुबा है बहुत महँगी
है पैसे की बड़ी रे तंगी
तुझ तक कैसे पहुँचू रे संगी।

तुम्हारी ऊँची हुई दुकान
हमारी फीकी पड़ी मुस्कान
हमारा चोली दामन का साथ
महबूबा उड़ रही तू आकाश।

सुख सुविधा हुई रे पराई
छीन लोगी क्या तू तरूणाई
अंदर बेबसी भरी रुलाई
ऊपर दिखावे की है बड़ाई

लुटा दूं ज़िन्दगी की कमाई
साथ छोड़ो ना तुम हरजाई
आसमां छूती ये महँगाई
सुन लो सुनो रे मेरे भाई ।

डॉ. इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार


Related Posts

कोशिश- अनीता शर्मा

November 23, 2021

 “कोशिश” कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। हिम्मत से आगे बढ़ कर प्रयत्न करते जाना है। मन में

आहत – सुधीर श्रीवास्तव

November 23, 2021

 आहत  कितना आसान है  किसी को आहत करना, जले पर नमक छिड़कना । पर जरा सोचिए कोई आपको यूँ आहत

जीवन रूपी चाय-डॉ. माध्वी बोरसे!

November 23, 2021

जीवन रूपी चाय! बचपन हमारा, सफेद दूध जैसा, जिंदगी ने लगाया, उबाल यह कैसा, कोई ना, जिंदगी को एक स्वादिष्ट

उड़ गई तितली- देवन्ती देवी चंद्रवंशी

November 22, 2021

 उड़ गई तितली कैसे कहूॅ॑ सखी कुछ कही न जाए मन हुई तितली देखो उड़ती जाए कैसे रोकूॅ॑ मेरी बावरी

खाया पिया कुछ नहीं ग्लास तोड़ा बारह आना-जयश्री बिर्मी

November 22, 2021

 खाया पिया कुछ नहीं ग्लास तोड़ा बारह आना किसान कानून की वापसी कही गढ़ आला पन सिंह गेला न बन

किस्से मोहब्बत के-तेज देवांगन

November 22, 2021

 किस्से मोहब्बत के किस्से मोहब्बत के किसको सुनाएं, सब यहां कहानीकार बने है। लिख दूं गजल मैं, गर किताबों पे,

Leave a Comment