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Dr. Alpa. H. Amin, poem

मन मेरा पुकारे…….

मन मेरा पुकारे……. मन मेरा पुकारे काना प्यारेकहाँ है ढिकाना हमको बता देकरनी है बातें तुझ से कब से हम …


मन मेरा पुकारे…….

मन मेरा पुकारे काना प्यारे
कहाँ है ढिकाना हमको बता दे
करनी है बातें तुझ से कब से हम तो पुकारे
गोकुल नगरी धूमके आये
यमुना की धारा से मिलके आये
दीदार तेरा कर न पाएं
मथुरा के द्वारे खड़े तुझ को पुकारे
अब तो आजा प्यारे

वृंदावन में रास तू रचाये
हम भी है रास के दीवाने
लेकर हाथों में बंसी सुहानी
आजा अब तो रास तू रचा जा प्यारे
सखियों संग करे इंतज़ार तेरा
दिखे ना तु तो मन घबराये
अब तो आजा प्यारे

तन की लय तुझे को पुकारे
तेरे बिना कौन हमें तारे
तू तो है पालन हारा कर दे बेड़ा पार हमारा
दर्शन के अभिलाषी हम तो
लेकर आंखों में अश्क के मोती तुझ को पुकारे
अब तो आजा प्यारे

कहते है सब रहता है तु मन के द्वारे
भक्तों के दिलों में करता बसेरा तु रे
देख खड़े हम भक्ति से सजकर
आजा प्यारे हम तो कब से पुकारे
अब तो आजा प्यारे

प्यासी नजर ढूढ़ रही है सांवरिया तु दर्शन दे दे
तड़प हमारी दर्द से सिसकतीं
फ़रियाद करे है रोती रोती
चाहत हमारी बस प्यास तेरी
दे दे दर्शन अब तो मुरारी अब तो आजा प्यारे…..!!
अब तो आजा प्यारे…. अब तो आजा प्यारे…..!!!!!

Dr.Alpa H Amin
Ahmedabad


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