Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Priyanka_saurabh

भेद सारे चूर कर दो|

माँ वीणा वादिनी मधुर स्वर दो,हर जिह्वा वैभवयुक्त कर दो ।मन सारे स्नेहमय हो जाए,ऐसे गुणों का अमृत भर दो …


माँ वीणा वादिनी मधुर स्वर दो,
हर जिह्वा वैभवयुक्त कर दो ।
मन सारे स्नेहमय हो जाए,
ऐसे गुणों का अमृत भर दो ।।

माँ वीणा की झंकार भर दो,
जीवन में नवल संचार कर दो ।
हर डाली खुशबुमय हो जाए,
ऐसे सब गुलजार कर दो ।।

अंतस तम को दूर कर दो,
अंधकार को नूर कर दो ।
मन से मन का हो मिलन,
भेद सारे चूर कर दो ।।

गान कर माँ रागिनी का,
भान कर माँ वादिनी का ।
पूरी हो सब कामनाएं,
दो सुर माँ रागिनी का ।।

(प्रियंका सौरभ के काव्य संग्रह ‘दीमक लगे गुलाब’ से।)

-प्रियंका सौरभ

About author 

प्रियंका सौरभ 

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,

कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार

facebook – https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/

twitter- https://twitter.com/pari_saurabh


Related Posts

कविता अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस 2021-किशन सनमुखदास

December 20, 2021

कविताअंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस 2021 अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस सबने मिलकर दिव्यांगजन को उत्साह देखकर मनाए हैं राष्ट्रपति प्रधानमंत्री ने अपने संदेश

कविता- महिला राजनीति क्षमता निर्माण-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

December 20, 2021

कविता महिला राजनीति क्षमता निर्माण राष्ट्रीय महिला आयोग ने राजनीति में महिलाओं के लिए क्षमता निर्माण करनेशी इज ए किंग

मुबारक हो नया साल-अजय प्रसाद

December 19, 2021

मुबारक हो नया साल लो फ़िर से नया साल मुबारक हो ज़िंदगी ये खस्ताहाल मुबारक हो। बस चंद रोज की

माँ- R.S.meena Indian

December 19, 2021

कविता माँ मैं व्रत नहीं करता ,कहीं माँ जैसी सूरत नहीं । माँ बाप को भूल जाऊ,ऐसा कभी मुहूर्त नहीं

पता नही-अजय प्रसाद

December 18, 2021

“पता नहीं “ खुश हूँ मैं या खफ़ा पता नही दुआ हूँ के बददुआ पता नही । हलचल तो है

भान दक्षिणायन भए- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 18, 2021

भान दक्षिणायन भए…!!! भान दक्षिणायन भए, शिशिर सरकारी।पछुआ बयार मोहे ,तीर सम लाग्यो है ।। बिकल बौराई मैं,थर-थर बदन काँप्यो।ऐसे

Leave a Comment