Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

भावनाओं को व्यक्त-डॉ. माध्वी बोरसे

भावनाओं को व्यक्त! क्यों होते हैं हम स्वयं के साथ सख्त,चलो करें, अपनी भावनाओं को व्यक्त,चिकित्सक भी होता है कभी …


भावनाओं को व्यक्त!

भावनाओं को व्यक्त-डॉ. माध्वी बोरसे

क्यों होते हैं हम स्वयं के साथ सख्त,
चलो करें, अपनी भावनाओं को व्यक्त,
चिकित्सक भी होता है कभी बीमार,
उसको भी जरूरत पड़ता है एक चिकित्सक!

हां हम सभी को है हक,
तो किस बात का है मन में शक,
एक बालक की तरह कर दे सब बयां,
स्वयं पर और अपनों पर भी भरोसा रख!

चल स्वयं को हृदय से परख,
जन्नत सी जिंदगी को क्यों बनाए नरक,
समझदारी में अपनी मासूमियत कहीं ना खोदे,
ना रहे, स्वयं के अंदर कोई कसक!

क्यों होते हैं हम स्वयं के साथ सख्त,
चलो करें, अपनी भावनाओं को व्यक्त,
चिकित्सक भी होता है कभी बीमार,
उसको भी जरूरत पड़ता है एक चिकित्सक!

डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

मुस्कुराना सीख रही

March 6, 2023

मुस्कुराना सीख रही मुस्कुराना सीख रही हूँ तुम्हारे बिना जीना सीख रही हूँहाँ आज फिर से मुस्कुराना सीख रही हूँजो

मेहनत ज़रूर करो पर सब योग है

March 6, 2023

भावनानी के भाव मेहनत ज़रूर करो पर सब योग है किसी का ईश्वर अल्लाह पर अपार विश्वास है कोई नास्तिक

आओ ख़ुशी से जीने की आस कायम रखें

March 6, 2023

 भावनानी के भाव आओ ख़ुशी से जीने की आस कायम रखें आओ खुशी से जीने की आस कायम रखें हम 

वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है

March 6, 2023

भावनानी के भाव वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है रक्षा क्षेत्र में समझौतों के झंडे गाड़ रहे

कविता एकत्व | kavita ekatatva

March 5, 2023

  एकत्व  एकाकी, एकाकी, जीवन है एकाकी । मैं भी हूं एकाकी तू भी है एकाकी, जीवन पथ पर है

स्थानीय भाषाओं में नवाचार कार्यक्रम चलाया है

March 5, 2023

भावनानी के भाव  स्थानीय भाषाओं में नवाचार कार्यक्रम चलाया है नवाचार में तीव्र विकास करने समृद्ध करने भाषाई अड़चनों को

PreviousNext

Leave a Comment