Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Priyanka_saurabh

भारत माँ की पीर| bharat ma ki peer

भारत माँ की पीर भारत के गणतंत्र की,ये कैसी है शान ।भूखे को रोटी नहीं,बेघर को पहचान ।। सब धर्मों …


भारत माँ की पीर

भारत के गणतंत्र की,
ये कैसी है शान ।
भूखे को रोटी नहीं,
बेघर को पहचान ।।

सब धर्मों के मान की,
बात लगे इतिहास ।
एक-दूजे को काटते,
ये कैसा परिहास ।।

प्रजातंत्र का तंत्र अब,
लिए खून का रंग ।
धरम-जात के नाम पर,
छिड़ती देखो जंग ।।

पहले जैसे कहाँ रहे,
संविधान के मीत।
न्यारा-न्यारा गा रहा,
हर कोई अब गीत ।।

विश्व पटल पे था कभी
भारत का सम्मान ।
लोभी नेता देश के,
लूट रहे वो मान ।।

रग-रग में पानी हुआ,
सोये सारे वीर ।
कौन हरे अब देश में
भारत माँ की पीर ।।

मुरझाये से अब लगे ,
उत्थानो के फूल ।
बिखरे है हर राह में,
बस शूल ही शूल।।

आये दिन ही बढ़ रहा,
देखो भ्रष्टाचार ।
वैद्य ही जब लूटते,
करे कौन उपचार ।।

कैसे जागे चेतना,
कैसे हो उद्घोष ।
कर्णधार ही देश के,
लेटे हो बेहोश ।।

(प्रियंका सौरभ के काव्य संग्रह ‘दीमक लगे गुलाब’ से।

About author 

प्रियंका सौरभ 

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,

कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार

facebook – https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/

twitter- https://twitter.com/pari_saurabh



Related Posts

नया भारत | New India

July 8, 2023

भावनानी के भाव नया भारत भारत नवाचारों का उपयोग करके ऐसी तकनीकी विकसित करता है जनता के लिए सस्ती सुगम

साहित्य राष्ट्र की महानता

July 6, 2023

भावनानी के भाव साहित्य राष्ट्र की महानता साहित्य राष्ट्र की महानता और वैभव का दर्पण होता है साहित्य को आकार

भारतीय नारी सब पर भारी- Kavita

July 6, 2023

भावनानी के भाव भारतीय नारी सब पर भारी पुरुषों से कम नहीं है आज की भारतीय नारी व्यवसाय हो या

नारी पर कविता | Naari par kavita

July 2, 2023

भावनानी के भाव  नारी पर कविता  नारी ऐसी होती है जो सभी रिश्तो को एक धागे में पिरोती हैमां बहन

मुझे कहॉं लेखन विद्या आती

July 2, 2023

मुझे कहॉं लेखन विद्या आती मुझे कहॉं सच लेखन विद्या आतीमैं तो बस खुद के लिए लिख जातीखुद को मिले

मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं

July 2, 2023

भावनानी के भाव मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं   मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं अटके काम

PreviousNext

Leave a Comment