Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

बेरोजगारी का एक पहलू यह भी- जितेन्द्र ‘कबीर’

बेरोजगारी का एक पहलू यह भी आजकल लोगों कोघर का काम करने के लिएईमानदार और मेहनती लोग नहीं मिलते,जमीन का …


बेरोजगारी का एक पहलू यह भी

बेरोजगारी का एक पहलू यह भी- जितेन्द्र 'कबीर'

आजकल लोगों को
घर का काम करने के लिए
ईमानदार और मेहनती लोग नहीं मिलते,
जमीन का काम करने वाले लोग भी
मिलते हैं मुश्किल से ही,

नहीं मिलते आसानी से सैनिटरी फिटिंग वाले,
एक बार आने के लिए दस फोन करवाते हैं
बिजली की फिटिंग वाले भी,

अच्छे मैकेनिक का पड़ा है हर जगह टोटा,
मोटरसाइकिल, गाड़ी से लेकर मोबाइल टीवी तक
ठीक करने वालों के पास होती हैं कतारें लगीं,

अपने बच्चों के लिए अच्छा ट्यूशन टीचर ढूंढना
काम है मुश्किल बड़ा,
अच्छे डॉक्टर के पास पहुंचने के लिए
लगाने पड़ते हैं जुगाड़ कई,

बड़े-बड़े टैक्निकल काम छोड़ भी दो तो
जायज दाम में अच्छी चाय और खाना भी
आजकल लोगों को आसानी से नसीब नहीं,

अगर डिग्री-डिप्लोमा कोई करके अगर
बैठ गये हो घर पर ही नौकरी का इंतजार करने
तो बेरोजगारी है तुम्हारे लिए समस्या बड़ी,
वरना मेहनत और ईमानदारी से
काम करने वालों को कभी भी
काम की कमी रहती नहीं।

जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति – अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

माँ का आँचल- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 25, 2022

कविता -माँ का आँचल माँ एक बार फिर से मुझको,आँचल ओढ़ के सो जाने देबचपन की यादें ताज़ा हो जाएँ

अक्ल पर पत्थर मढ़े जाएं- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

अक्ल पर पत्थर मढ़े जाएं दुनिया में लोगों ने पहलेअपनी – अपनी आस्था के अनुसारमंदिर, मस्जिद, गिरजे, गुरुद्वारेऔर भी नाना

शीत लहर – डॉ. इन्दु कुमारी

January 25, 2022

शीत लहर है बड़ी शबाब परहाड़ कंपाने वालीअमीरों की कुछ नहै बिगाड़ने वालीगरीबों की झोपड़ीमें सनसनी फैलानेधाक जमाने वालीआहत करने

चाँद और मैं- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 25, 2022

चाँद और मैं अमावस की काली रातों मेंउलझी हुई कई बातों मेंन पूछ! किस तरहा रहते हैंचाँद और मैं एक

अंजान राहें!- अनिता शर्मा

January 25, 2022

अंजान राहें!! है अंजान राहें थमती नहींनित नये रास्ते मिलते ही जायें।जीवन डगर पर मुस्कान बिखेरीबढ़ते चले हैं बाधाओं से

स्वतंत्रत विचार- अनिता शर्मा झाँसी

January 25, 2022

स्वतंत्रत विचार एक टूटता हुआ तारा!!असमान में बिखरे तारेकितने सुन्दर कितने प्यारे। अपलक रोज निहारा करतीसहसा टूटा एक तारा…अनायास ही

Leave a Comment